बहुजन संगठक: मान्यवर कांशीराम साहब की विरासत को आगे बढ़ा रहा है राजेश कुमार सिद्धार्थ लखनऊ। बहुजन समाज के पुरोधा मान्यवर कांशीराम साहब द्वारा स्थापित “बहुजन संगठक” समाचार पत्र को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का कार्य वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी राजेश कुमार सिद्धार्थ कर रहे हैं। इस समाचार पत्र


बहुजन संगठक: मान्यवर कांशीराम साहब की विरासत को आगे बढ़ा रहा है राजेश कुमार सिद्धार्थ

लखनऊ।
बहुजन समाज के पुरोधा मान्यवर कांशीराम साहब द्वारा स्थापित “बहुजन संगठक” समाचार पत्र को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का कार्य वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी राजेश कुमार सिद्धार्थ कर रहे हैं। इस समाचार पत्र के राष्ट्रीय हिंदी दैनिक संस्करण का शुभारंभ बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पौत्र यशवंत भीमराव अंबेडकर ने किया।
उन्होंने इस अवसर पर कहा कि “बहुजन संगठक केवल एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि बहुजन समाज का मिशन है। इसकी विरासत को संभालने का कार्य राजेश कुमार सिद्धार्थ ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया है।”

उद्घाटन समारोह में दलित घोष मासिक पत्रिका का भी विमोचन किया गया। यशवंत अंबेडकर ने कहा कि “सदियों से उत्पीड़ित समाज की आवाज बनने वाले इस समाचार पत्र के संस्थापक मान्यवर कांशीराम साहब को मैं शत-शत नमन करता हूँ। राजेश कुमार सिद्धार्थ ने 2010 से आज तक इस मिशन को निरंतर आगे बढ़ाया है।”

कार्यक्रम में अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री) श्री विश्वनाथ ने कहा कि “राजेश कुमार सिद्धार्थ कठिन परिस्थितियों में भी बहुजन संगठक को साप्ताहिक से दैनिक समाचार पत्र के रूप में प्रकाशित कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय संपादक सोनम गौतम को कमान सौंपकर समाज के नए नेतृत्व को भी अवसर दिया है।”

उन्होंने आगे कहा कि “राजेश कुमार सिद्धार्थ न केवल लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया के प्रतिनिधि हैं, बल्कि समाज के सशक्त नेतृत्वकर्ता भी हैं। उनका योगदान बाबा साहेब और कांशीराम साहब के सपनों को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर है।”

समारोह में डॉ. आर. आर. जैसवार, डॉ. सत्य दोहरे, पं. प्रदीप पासी, अभय प्रताप सिंह त्यागी, सीमा गौतम, सोनम गौतम और संतोष कुमार सहित कई समाजसेवी एवं बौद्धिक जन उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि “राजेश कुमार सिद्धार्थ न केवल एक वरिष्ठ पत्रकार हैं, बल्कि बहुजन समाज के निस्वार्थ सेवक हैं। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत कमाई समाज की चेतना जगाने में लगाई है। एक दिन निश्चित रूप से उनका नाम इतिहास के स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा।”

कार्यक्रम का समापन “जय भीम, जय भारत, जय संविधान, नमो बुद्धाय” के उद्घोष के साथ हुआ।

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