राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार और संगठनों की भूमिका राजेश कुमार सिद्धार्थ का संघर्ष केवल सीतापुर की सीमाओं में नहीं सिमटा। उनका उद्देश्य स्पष्ट था — दलितों, किसानों, मज़दूरों, महिलाओं और सर्वसमाज को एक मंच पर लाना, ताकि बाबा साहेब अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम जी के सपनों को साकार किया जा सके। इ


राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार और संगठनों की भूमिका

राजेश कुमार सिद्धार्थ का संघर्ष केवल सीतापुर की सीमाओं में नहीं सिमटा। उनका उद्देश्य स्पष्ट था — दलितों, किसानों, मज़दूरों, महिलाओं और सर्वसमाज को एक मंच पर लाना, ताकि बाबा साहेब अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम जी के सपनों को साकार किया जा सके। इसी उद्देश्य से उन्होंने कई संगठनों की नींव रखी और उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक विकास परिषद

इस परिषद के माध्यम से उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में सामाजिक न्याय की अलख जगाई। परिषद का उद्देश्य था —

अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करना,

समाज के उपेक्षित तबके को संगठनात्मक रूप से सशक्त बनाना,

और प्रशासनिक अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाना।

इस परिषद की अगुवाई में उन्होंने सीतापुर, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, इटावा, कानपुर, औरैया, सिद्धार्थनगर और लखनऊ में कई ऐतिहासिक धरने व सम्मेलन आयोजित किए।
उनका यह अभियान न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों में सामाजिक जागरण का प्रतीक बन गया।

पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ — पत्रकारिता — की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भी संघर्ष किया।
उन्होंने पत्रकारों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठाई और लगभग 10,000 से अधिक पत्रकारों को एक मंच पर लाने का कार्य किया।
उनका मानना था कि जब पत्रकारिता निष्पक्ष होगी तभी समाज में सच्चाई कायम रह सकती है।
इस मिशन के कारण वे देशभर के पत्रकारों के बीच जनप्रिय नेता और अभिभावक के रूप में पहचाने जाने लगे।

डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ

बहुजन चिंतकों और राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जब यह महसूस किया कि देश में फिर से संवैधानिक मूल्यों पर खतरा मंडरा रहा है, तब उन्होंने एक नए संगठन की स्थापना की — डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ
इस महासंघ की राष्ट्रीय अध्यक्षता की जिम्मेदारी राजेश कुमार सिद्धार्थ को सौंपी गई।
उनकी ईमानदारी, निष्ठा और अटूट संघर्षशीलता को देखते हुए यह सर्वसम्मत निर्णय लिया गया।

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने महासंघ को एक जनआंदोलन का रूप दिया। उन्होंने संविधान की रक्षा को अपना सबसे बड़ा मिशन बना लिया।
28 जनवरी 2024 को लखनऊ विधानसभा के सामने उन्होंने “75 रथ – 75 जनपद” अभियान का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य था —
हर जिले में जाकर संविधान, समानता और सामाजिक न्याय के संदेश को आम जनता तक पहुँचाना।
यह अभियान उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक अद्वितीय मिसाल बना।
उन्होंने कहा था,

उनके नेतृत्व में डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ ने यह स्पष्ट किया कि कोई भी ताकत भारतीय संविधान को कमजोर नहीं कर सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान बदलने की कोशिश करने वालों को सत्ता के दरवाजे तक पहुँचने नहीं दिया जाएगा, और जनशक्ति के माध्यम से इसका जवाब दिया जाएगा।

आज यह महासंघ पूरे भारत में एक सक्रिय संगठन बन चुका है — जिसमें हजारों कार्यकर्ता और लाखों समर्थक जुड़ चुके हैं।
हर जनपद में संविधान की मशाल जल रही है, और यह सब संभव हुआ है राजेश कुमार सिद्धार्थ की अथक मेहनत, नेतृत्व और निडर सोच से।

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।