आज 20 अक्टूबर को करवा चौथ का त्योहार मनाया जा रहा है. सुहागिन महिलाएं शाम के समय सज धजकर बेसब्री से चांद इंतजार करती हैं. करवा चौथ के दिन निर्जला व्रत रखकर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सौभाग्य, समृद्धि और सुखी जीवन की कामना करती हैं. दिनभर भूखे प्यासे रहकर रात को चांद का दीदार ह


आज 20 अक्टूबर को करवा चौथ का त्योहार मनाया जा रहा है. सुहागिन महिलाएं शाम के समय सज धजकर बेसब्री से चांद इंतजार करती हैं. करवा चौथ के दिन निर्जला व्रत रखकर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सौभाग्य, समृद्धि और सुखी जीवन की कामना करती हैं. दिनभर भूखे प्यासे रहकर रात को चांद का दीदार होने पर ही व्रत पूरा माना जाता है और चांद दिखने पर पूजा-पाठ करने के बाद ही करवा चौथ का व्रत खोलने का विधान है.

अगर चांद नजर न आए तो क्या करें ?

करवा चौथ के व्रत और चांद का गहरा कनेक्शन है. सुहागिने दिनभर भूखी-प्यासी रहती हैं, चांद निकलने के बाद छलनी से पति का चेहरा और चंद्रमा का दीदार करती हैं. चांद को अर्घ्य दिया जाता है और पूजा की जाती है. इसके बाद ही करवा चौथ का व्रत पूरा माना जाता है. चांद दिखने के बाद ही सुहागिनें व्रत खोलती हैं, लेकिन सवाल ये है कि अगर किसी कारणवश करवा चौथ के दिन चांद ना दिखे तो व्रत कैसे तोड़ें ?

दरअसल मौसम खराब होने या बादल छाने की स्थिति में चांद नजर नहीं आता है. इसी तरह बड़े शहरों में प्रदूषण और गगनचुंभी इमारतों से चांद के दर्शन दुर्लभ हो जाते हैं. ऐसे में क्या करना चाहिए ? कुल्लू के आचार्य दीप कुमार का कहना है, "अगर चंद्रमा आसमान में नजर ना आए तो ऐसे में कई उपाय किए जा सकते हैं. इस स्थिति में महिलाएं निराश न हों, बल्कि भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा के दर्शन कर अपना व्रत खोल सकती हैं. अगर आपके घर में भगवान शिव की ऐसी कोई प्रतिमा न हो, तो मंदिर जाकर भी व्रत खोल सकते हैं. व्रत खोलने का सबसे अच्छा उपाय ये भी है कि जिस दिशा से चांद का उदय होता है. उधर मुंह करके चंद्रमा का ध्यान करें और व्रत खोलें. वहीं, महिलाएं पूजा घर में चावल का चंद्रमा बनाकर भी विधि-विधान से उनकी पूजा करके अपना व्रत खोल सकती हैं."

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