पत्रकारों की उत्पन्न को लेकर अनुप्रिया पटेल ने प्रशासन को हिदायत
पत्रकारों का उत्पीड़न क्यों
चोरों से जनता थी परेशान
*ग्रामीणों ने चोरों को दबोचा, पुलिस ने खोला गौ-तस्करी का राज!*
*लव सिंह यादव/अब तक न्याय*
(फतेहपुर उत्तर प्रदेश): जिले के किशनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत सरौली गांव की गलियों में शुक्रवार देर रात "चोर-चोर" का शोर गूंजा, और ग्रामीणों की हिम्मत ने एक बड़े मवेशी चोर गिरोह को बेनकाब कर दिया! शुरू में अफवाह समझी गई इस घटना ने तब सबको चौंका दिया, जब किशनपुर पुलिस की जांच में पकड़े गए चार युवक गौशाला से गाय चुराने और गोकशी की साजिश रचने वाले अपराधी निकले। ग्रामीणों की सतर्कता और पुलिस की तेजी ने दो गायों को बचा लिया और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
20 सितंबर की रात करीब सरौली गांव की गौशाला के पास एक संदिग्ध कार (UP78 CA 2329) ने ग्रामीणों का ध्यान खींचा। शक होने पर "चोर-चोर" का शोर मच गया। गुस्साए ग्रामीणों ने चार युवकों को पकड़कर पिटाई कर दी और कार को तोड़ डाला। किशनपुर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात संभाले और घायलों को अस्पताल भेजा।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई! पुलिस की जांच ने पलट दी पूरी तस्वीर। पकड़े गए युवक—मो. अमान, अयूब अली, मुबीन (कानपुर) और जसवंत सिंह (सरौली)—गौ-तस्करी के बड़े रैकेट का हिस्सा थे। पुलिस ने इनके पास से दो गायें, एक तमंचा, कारतूस, गोकशी के औजार, तीन मोबाइल और 100 रुपये बरामद किए। चौंकाने वाली बरामदगी
पुलिस ने कार (UP78 CA 2329), एक 315 बोर तमंचा, एक खोखा और एक जिंदा कारतूस, दो चापड़, एक लकड़ी का ठीहा, और एक काली पन्नी जब्त की। मो. अमान का तो पुराना रिकॉर्ड है—कानपुर में गौवध, पशु क्रूरता और आर्म्स एक्ट के कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने बीएनएस, आर्म्स एक्ट और गोवध निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा (0225/2025) दर्ज कर लिया।
*ग्रामीणों की हिम्मत, पुलिस की तारीफ*
ग्रामीणों की सतर्कता ने इस बार गायों को चोरों के चंगुल से बचा लिया। स्थानीय किसान रामलाल ने गर्व से कहा, "हम रातभर जागते हैं, गायें हमारी जिंदगी हैं। उस रात हमने चोरों को भागने नहीं दिया!" लेकिन कुछ ग्रामीणों का गुस्सा भी फूटा, "हम मेहनत करते हैं, पर पुलिस क्रेडिट ले जाती है।"
पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार सिंह ने ग्रामीणों की तारीफ की और कहा, "उनके सहयोग के बिना यह मिशन अधूरा था।" गिरफ्तारी में उपनिरीक्षक भुवनेश्वर यादव, सालिकराम, कांस्टेबल विवेक यादव, राजेश तिवारी और स्थानीय प्रधान की भूमिका अहम रही।
*अफवाहों का खतरा, सतर्कता की जरूरत*
यह घटना ग्रामीणों की हिम्मत की मिसाल है, लेकिन "चोर-चोर" की अफवाहें खतरनाक भी हो सकती हैं। फतेहपुर में हाल के दिनों में अफवाहों के चलते निर्दोष लोग भी निशाना बने हैं। पुलिस ने अपील की, "शक हो तो 112 डायल करें, भीड़तंत्र से बचें।"
फतेहपुर में मवेशी चोरी की बढ़ती वारदातों ने ग्रामीणों को रातों की नींद हराम कर रखी है। लोग मांग कर रहे हैं कि पुलिस गश्त बढ़ाए और गौशालाओं की सुरक्षा मजबूत करे। साथ ही, ग्रामीणों की बहादुरी को सम्मान देने के लिए इनाम योजना शुरू हो।सरौली गांव की इस कहानी ने दिखाया कि जब गाँव जागता है और पुलिस साथ देती है, तो अपराधी बच नहीं सकते। लेकिन सवाल यह है—क्या ग्रामीणों की मेहनत को पूरा हक मिलेगा, या सिर्फ प्रेस नोट में उनका नाम गुम हो जाएगा?
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राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप
पत्रकारों का उत्पीड़न क्यों
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