उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री और अपनी पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या ने बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को लेकर बड़ा बयान दिया है. उनके इस बयान से उनके बसपा में शामिल होने के संकेत मिल रहे हैं. बयान के बाद अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या फिर से वह मायावती के साथ हाथ मिलाएंगे?
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पहले बस्ती मंडल में लोक मोर्चा के बैनर तले 10 राजनीतिक दलों का शक्ति प्रदर्शन हुआ. विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन आए. भीड़ ने साफ कर दिया कि आने वाले चुनाव में नई राजनीतिक जंग दिलचस्प होने वाली है.
इस सम्मेलन में मुख्य वक्ता लोक मोर्चा के संयोजक और पूर्व मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्या ने शिरकत की. इसी दौरान मौर्या ने बीएसपी से अलग होने का कारण बताते हुए कहा कि अगर बहन जी अपने पुराने मिशन पर लौट आती हैं तो वह खुशी-खुशी उनके साथ मिलकर काम करेंगी क्योंकि बीएसपी से अलग होने का कारण ही यही था कि बहन जी बाबा साहब के मिशन और मान्यवर कांशीराम के सामाजिक परिवर्तन आंदोलन से किनारा कर लिया.
खुशी होगी कि बहन जी...
मौर्या ने कहा कि अगर वह पुराने रास्ते पर आ जाती हैं तो स्वाभाविक रूप से हम सभी मिशन पर एक साथ काम करने के लिए आगे बढ़ेंगे. हमें खुशी होगी कि बहन जी अपने मिशन पर पुराने लौटें.
बता दें वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के पहले स्वामी प्रसाद मौर्या सपा में आ गए थे. इसके बाद जब सपा में उन्हें सफलता नहीं मिली तो उन्होंने अपनी पार्टी बनाई. छोटे छोटे दलों को साथ लाकर वह एक लोक मोर्चा भी गठित कर चुके हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बसपा और उसके नेतृत्व को स्वामी का ऑफर कितना पसंद आता है.
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