विकास की बातें फाइल में, हकीकत कुछ और बया कर रही हैं


भारत ने अपनी 79वीं आज़ादी में चांद और मंगल तक पहुंचने का सफर तय कर लिया है, लेकिन देश के गली-मोहल्लों और सड़कों पर मौजूद गड्ढे अभी भी अपनी जगह पर कायम हैं। विज्ञान के युग में उपग्रह आसमान में घूम रहे हैं, लेकिन बरसात के मौसम में मोहल्लों का पानी लोगों के घरों में घुसना आम बात है।
शासन-प्रशासन की प्राथमिकता अभी भी चमकदार घोषणाओं और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित है।
फाइलों में विकास योजनाओं के रंग-बिरंगे नक्शे बनते हैं, लेकिन जमीन पर वही पुराने गड्ढे और अव्यवस्थित नाले जनता को विकास की असली तस्वीर दिखाते हैं।

नेताओं के वादे और हकीकत हर साल 15 अगस्त को नेता तिरंगा लेकर फोटो खिंचवाते हैं और उनके भाषण में गांव-गांव में विकास की बातें होती हैं।जिस सड़क से नेता गुजरते हैं, अगले दिन वही सड़क फिर से कीचड़ और गड्ढों से भर जाती है। नालों की सफाई और सड़क मरम्मत का वादा किया जाता है, लेकिन जनता को बताया जाता है कि बजट पास होते ही काम होगा।
79 साल बाद भी हकीकत यही है कि हम चांद और मंगल के सपने देख रहे हैं, लेकिन धरती पर गली-मोहल्लों के हालात सामने आईना दिखा रहे हैं। जब तक शासन-प्रशासन अपनी प्राथमिकताएं पोस्टरों से निकालकर गली-मोहल्लों में नहीं उतारेगा और नेता फोटोशूट से निकलकर नाले-गड्ढों पर ध्यान नहीं देंगे, तब तक हर साल विकास 8 साल की बातें होती रहेंगी।

 

(पत्रकार संतराज यादव)

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Rajesh Kumar Siddharth

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राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप

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