राजेश कुमार सिद्धार्थ ने निम्नलिखित घटनाओं का उजागर किया है:
1. तमिलनाडु के किलवेनमनी में 25 दिसम्बर 1968 को 44 दलितों की हत्या।
2. बथानी टोला में 11 जुलाई 1996 को 21 दलितों की हत्या।
3. लक्ष्मणपुर बाथे में 1 दिसम्बर 1997 को 58 दलितों की हत्या, जिसमें 27 महिलाएँ और 10 बच्चे थे।
4. तमिलनाडु के विल्लूपुरम में 1978 में 12 दलितों की हत्या और 100 दलित झोपड़ियों को जलाना।
5. आंध्र प्रदेश के तसुंदर में 6 अगस्त 1991 को 8 दलितों की हत्या।
6. बिहार के बेलचि गाँव में 27 मई 1977 को 8 दलित और 3 पिछड़ों की हत्या।
7. पटना के पास पारसबीघा में 1979 में 11 दलित और 1 यादव की हत्या।
8. शंकरबीघा में 1999 में 23 दलितों की हत्या।
9. नोनहीगढ़ नगवाँ में 1988 में 19 दलितों की हत्या।
10. भोजपुर के दनवर-बिहटा गाँव में 1989 में 23 दलितों की हत्या।
11. दलित दूल्हों को घोड़ी चढ़ने नहीं देना।
12. दलित महिलाओं को अपना स्तन ढकने नहीं देना।
13. वेदों का मंत्र सुनने वाले दलितों के कान में पिघला हुआ सीसा डालना।
14. दलितों के गले में हांडी बंधा टाँकी और कमर में झाड़ू बंधना।
इन घटनाओं के माध्यम से उन्होंने जाति आधारित हिंसा और भेदभाव की गंभीरता को उजागर किया है।
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