झांसी अग्निकांड: कब थमेगा मौत का सिलसिला? अब तक 15 बच्चों की मौत; पांच माह पहले जता दी गई थी अनहोनी की आशंका


बुधवार को दो और बच्चों ने दम तोड़ दिया। इन दोनों की मासूमों को अग्निकांड के दौरान रेस्क्यू के दौरान बचाया गया था।महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा केंद्र (एसएनसीयू) में हुए हादसे के बाद से नवजातों की मौत का सिलसिला लगातार बना हुआ है। हादसे में बचाए गए तीन और नवजातों की सांसें थम गईं हैं। इसके साथ ही मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 पर पहुंच गईं हैं। दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है।

मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में 15 नवंबर की रात भीषण आग लग गई थी। हादसे के वक्त वार्ड में 49 नवजात भर्ती थे, जिनमें से आग की चपेट में आने से 10 नवजातों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। जबकि, बाकी 39 बच्चों को आग से बचाकर मेडिकल कॉलेज व निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया था।

हादसे के बाद से बचाए गए बच्चों की मौत का क्रम लगातार बना हुआ है। हादसे के बाद एक-एक कर दो बच्चों की पहले ही मौत हो गई। जबकि, मंगलवार की रात रक्सा थाना इलाके के ग्राम बजाना निवासी काजल पत्नी बॉबी के बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद बुधवार की दोपहर ग्राम बमेर निवासी लक्ष्मी पत्नी महेंद्र की बच्चे की मौत हो गई। इसके अलावा मऊरानीपुर निवासी पूजा पत्नी कृष्णकांत के बच्चे की सांसें थम गईं।

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डाॅ. एनएस सेंगर ने बताया कि तीनों बच्चों की मौत बीमारी से हुई है। ये बच्चे आग से नहीं झुलसे थे और न ही धुएं से इन्हें कोई नुकसान हुआ था।रिपोर्ट में जताई जा चुकी थी अनहोनी की आशंका, नहीं चेते जिम्मेदार
विद्युत सुरक्षा विभाग ने जून की ऑडिट रिपोर्ट में अनहोनी की आशंका जताकर खामियां जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। ऑडिट में कई जगह प्रतिबंधित एल्युमिनियम तार मिले। कई जगह कॉपर वायर के इंसुलेशन कमजोर मिले। पैनल भी मानक के अनुसार नहीं मिले। ट्रांसफार्मरों से लेकर वार्ड, ओपीडी आदि कई खामियां मिली थीं। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन के साथ-साथ कॉलेज प्राचार्य को भी भेजी गई मगर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।रिपोर्ट में जताई जा चुकी थी अनहोनी की आशंका, नहीं चेते जिम्मेदार
विद्युत सुरक्षा विभाग ने जून की ऑडिट रिपोर्ट में अनहोनी की आशंका जताकर खामियां जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। ऑडिट में कई जगह प्रतिबंधित एल्युमिनियम तार मिले। कई जगह कॉपर वायर के इंसुलेशन कमजोर मिले। पैनल भी मानक के अनुसार नहीं मिले। ट्रांसफार्मरों से लेकर वार्ड, ओपीडी आदि कई खामियां मिली थीं। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन के साथ-साथ कॉलेज प्राचार्य को भी भेजी गई मगर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।साढ़े 10 बजे हुआ था शॉर्ट सर्किट
मेडिकल कॉलेज की एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट) में शुक्रवार की रात करीब साढ़े 10 बजे शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे एक्सटेंशन कॉर्ड में आग लगी। बुझाने से पहले ही आग नजदीक के वेंटिलेटर तक पहुंच गई। कुछ ही देर में आग विकराल हो गई और 10 नवजात शिशुओं की जलकर मौत हो गई।जांच में मिली तमाम खामियां
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि फरवरी में सेफ्टी ऑडिट हुई थी और जून में मॉकड्रिल, इसलिए आग लगने का पता लगाकर दोषी पर कार्रवाई होगी। वहीं, अब सामने आया है कि जिलाधिकारी के निर्देश पर चीफ फायर ऑफिसर और सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा ने मेडिकल कॉलेज की अग्नि सुरक्षा ऑडिट की जिसमें तमाम खामियां मिलीं। दोनों अधिकारियों ने इसकी रिपोर्ट सौंपी।खामियां हों जाती दूर तो बच जाती 14 बच्चों की जान
सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा ने दो पेज की रिपोर्ट में बताया कि कई जगह पर प्रतिबंधित एल्युमिनियम के तार लगे हुए हैं। कई जगह कॉपर के वायर की इंसुलेशन खराब है। ट्रांसफार्मर से लेकर पैनल तक और वार्ड से ओपीडी तक कई खामियां हैं। रिपोर्ट में जल्द खामियां सुधारने की बात कहते हुए अनहोनी की आशंका भी जताई गई। हैरानी की बात है कि कॉलेज प्रशासन ने ऑडिट रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे 14 नवजातों की जान चली गई।एल्युमिनियम तार में लगा हुआ था जंग
सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा सीबी चौबे ने बताया कि जून की ऑडिट रिपोर्ट में मिली खामियों की रिपोर्ट प्रशासन के माध्यम से कॉलेज प्रशासन को भेजी गई थी। रिपोर्ट में खामियों का उल्लेख करते हुए जल्द दुरुस्त करने के लिए कहा गया था। कई जगह प्रतिबंधित एल्युमिनियम तार लगे मिले, जिनके जोड़ों में जंग लगने से शॉर्ट सर्किट हो सकता है।ऑडिट रिपोर्ट पर नहीं उठा गया कदम
शासन की तरफ से भेजी गई जांच टीम की अध्यक्ष चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. किंजल सिंह ने कहा विद्युत सुरक्षा की ऑडिट रिपोर्ट में प्रतिबंधित एल्युमिनियम वायर के प्रयोग की बात है। इसके चलते चार वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट जांच के लिए ली है। ट्रांसफार्मर से लेकर पैनल तक कई खामियों का भी उल्लेख है। कॉलेज प्राचार्य से पूछा है कि ऑडिट रिपोर्ट को लेकर क्या कदम उठाए गए।

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