संपूर्ण ब्रह्मांड में देव देवेश्वर परम पवित्र भगवान शिव की स्तुति वेद पुराण रामायण तथा सभी प्राचीन धार्मिक पुस्तकों में पाई जाती है वेद कहते हैं


संपूर्ण ब्रह्मांड में देव देवेश्वर परम पवित्र भगवान शिव की स्तुति वेद पुराण रामायण तथा सभी प्राचीन धार्मिक पुस्तकों में पाई जाती है वेद कहते हैं।  जो संपूर्ण प्राणियों के रक्षक हैं पाप  ध्वस्त करने वाले हैं परमेश्वर हैं गजराज की खाल पहने हैं तथा श्रेष्ठ हैं और जिन के मस्तक पर गंगा जी खेल रही है उन श्री महादेव जी का मैं स्मरण करता हूं 
जो परमात्मा है एक है जगत के आदि कारण हैं इच्छा रहित हैं निराकार हैं और प्रणव द्वारा जानने योग्य हैं तथा जिन पर संपूर्ण विश्व की उत्पत्ति होती है और पालन होता है और फिर उसमें लय हो जाता है  शिवजी को मैं भजता हूं
जो ना पृथ्वी है ना जल है ना अग्निहै ना वायु है और ना ही आकाश है  ना निद्रा है ना ग्रीष्म है और ना शीत ग्हैं तथा जिनका न कोई देश है ना वेशभूषा है उन मुर्तिहीन त्रिमूर्ति की मैं स्तुति करता हूं।  हे देव है शंकर हे करुणामय गौरी पति समस्त जगत तुम ही से उत्पन्न होता है तुम ही में स्थित रहता है और तुम ही में विलय हो जाता है परम ब्रह्म स्वरूप भगवान शिव को शत-शत प्रणाम

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