कथा प्रसिद्ध है नबीनगर स्टेट का मैनेजर पीसी डन स्टेट की देखरेख करता था


लहरपुर सीतापुर श्रावण मास में सब कहानी हर हर महादेव के नारे जय भोले की गूंज सुनाई दे रही है सभी मंदिरों पर भक्तगण विशेष रूप से पूजा अर्चना करते हैं तथा कांवरिया जलाभिषेक करते हैं सभी लोग भगवान शिव की कृपा पाने के लिए तत्पर है जनपद के लहरपुर क्षेत्र में सर्वाधिक महत्वपूर्ण मंदिर जंगली नाथ बाबा माने जाते हैं लहरपुर नगर के उत्तर और पश्चिम 3 किलोमीटर की दूरी पर जंगली नाथ गांव में विराजमान जंगली नाथ बाबा का अपना अलग महत्व है लोगों में बड़ी श्रद्धा है इसका इतिहास भी कम रोचक नहीं है
कथा प्रसिद्ध है नबीनगर स्टेट का मैनेजर पीसी  डन स्टेट की देखरेख करता था अंग्रेजों ने ऐसा नियम बनाया था जिनके संतान नहीं होती थी उन राज्यों को अपने अधीन कर लेते थे यहां पर भी ऐसा ही था एक दिन ब्रिटिश से फरमान आया की वापस आ जाओ तुम्हें युद्ध में जाना है पीसी डन यहां आइसो आराम की जिंदगी व्यतीत कर रहा था वह युद्ध में भाग लेना नहीं चाहता था तभी स्थानीय लोगों ने उसे सलाह दी उसे जंगली नाथ मंदिर पर जाकर शिवजी का दर्शन करो और प्रार्थना करो यह सुनकर अंग्रेज अधिकारी जंगली नाथ मंदिर पर जाकर प्रार्थना की कि मेरा ट्रांसफर रुक जाए मैं यहां मंदिर और तीर्थ बनाऊंगा चमत्कार हुआ दूसरे दिन ही फरमान आ गया कि आप वहीं रुक रहे तत्कालीन रानी नबीनगर स्टेट पृथ्वीपाल कुंवरि धार्मिक और लोकप्रिय रानी थी उन्होंने पूरा सहयोग किया 1918 से 1921 तक काम होता रहा भव्य मंदिर का निर्माण उत्तर में तीर्थ तथा यात्रियों के रहने के लिए सराय बनाई गई जिससे इस स्थान की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई सावन के हर सोमवार को मेला लगता है तथा रक्षाबंधन वाले दिन विशाल मेला होता है जिसमें दूर दराज के भक्त लोग आकर मनौती मांगते हैं और भगवान शिव पर जल चढ़ाते हैं इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक प्रसिद्ध है

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।