जिला क्राइम ब्यूरो चीफ रन्नो सिंह फतेहपुर से


जिला क्राइम ब्यूरो चीफ रन्नो सिंह फतेहपुर से


वन माफिया बने हरियाली के दुश्मन उजाड़ रहे पेड़-दर-पेड़
वन विभाग व असोथर थाने कि पुलिस की शिथिलता वन माफियाओं के लिये बनी वरदान

असोथर पुलिस की निष्क्रियता से थाना क्षेत्र बन गया माफियाओं का शरणगाह  


फतेहपुर 15 जुलाई। जनपद में इस समय गर्मी ने हाय-तौबा मचा रखा है। गर्मी से लोगों का ही नही पशु-पक्षी तक का जीवन अस्त-व्यस्त है। गर्मी लागातार बढ़ने का एक बड़ा कारण दिनो-दिन हो रही वन संपदा की हानि है। जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। पर्यावरण की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले हरे भरे पेड़ पौधे तमाम कवायदों के बाद भी दिन प्रतिदिन कम होते जा रहे हैं। इसका बड़ा कारण पुलिस व वन विभाग का गठजोड़ है। विभागीय उदासीनता का परिणाम ही है कि हरे पेड़ों की बेखौफ कटाई की जा रही है। जितने पेड़ कट रहे उसकी तुलना में पौधारोपण व पेड़ों का संरक्षण नहीं हो रहा है। वन विभाग की उदासीनता तो इस कदर हावी है कि प्रतिबंधित वृक्षो की कटान वन माफियाओं द्वारा बेखौफ होकर धड़ल्ले से कराई जा रही है। बता दें कि जनपद में वैसे तो अधिकतर जगहों से प्रतिबंधित वृक्षों की कटान की खबरों की चर्चा सुनने देखने को मिलती रहती है पर असोथर थाना क्षेत्र आज कल प्रतिबंधित वृक्षों की कटान के लिए खासा चर्चित बना हुआ है। वन दरोगा व क्षेत्रीय थाना पुलिस की शिथिलता वन माफियाओं के लिये वरदान साबित हो रही है। पेड़ कटने का सिलसिला अभी भी थमने का नाम नही ले रहा है। सूत्रों की माने तो क्षेत्र में पिछले एक माह के दौरान लगभग आधा सैकड़ा प्रतिबंधित वृक्षों की कटान विभिन्न स्थानों से विभिन्न वन माफियाओं द्वारा कराई गई है, जबकि वन विभाग के क्षेत्रीय जिम्मेदार अनजान बने रहे। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि क्षेत्र के जमलामऊ, कंधिया, बेराव, बेसडी, छिच्छनी, बिलारीमऊ, कुसुंभी, लूशरू का डेरा असोथर कस्बा,बेरुई ,कटरा, गडरियापुरवा, आदि क्षेत्र में पिछले दिनों प्रतिबंधित वृक्षों की कटान वन माफियाओं द्वारा की गई है। अब सवाल ये है कि वन विभाग के क्षेत्रीय जिम्मेदार द्वारा इतनी कटान के बावजूद कार्यवाही क्या हुई है? हालांकि इस सम्बंध में जब वन विभाग के क्षेत्रीय जिम्मेदार रामराज से फोन द्वारा बात  किया गया तो उनके द्वारा  बताया गया कि 50 सागौन के पेड़ों का परमिशन है किंतु ठेकेदार द्वारा 128 पेड़ सागौन के धराशाही कर दिए गए हैं उनके खिलाफ असोथर थाने में मुकदमा दर्ज कराया  जा रहा है। हालांकि पत्रकारों द्वारा ठेकेदार से पूछने पर उन्होंने 15 सागौन पेड़ों का परमिशन दिखाया गया था।

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