जिला चिकित्सालय मे भारतीय जनता पार्टी प्रणीत के कार्यकर्ताओं ने रक्तदान किया व बाटे फल
रायबरेली ब्रजेश त्रिपाठी
कमीशन लेने वाले ने दर्ज कराई एफआईआर, महमूदाबाद सीतापुर,
कमीशन लेने वाले ने दर्ज कराई एफआईआर,
महमूदाबाद सीतापुर,
जहाँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ भृष्टाचारियों पर नकले कसने में पीछे नहीं हट रहे हैं, तो वहीं भृष्टाचार करने वाले नित नये पैंतरा बदल कर भृष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं,
आपको बताते चलें कि सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक जनपद सीतापुर की ब्लाक महमूदाबाद क्षेत्र की 4 ग्राम पंचायत में विकास कार्य को लेकर भृष्टाचार किया गया था, इसकी शिकायत जनपद के आलाधिकारियों से लेकर सूबे के मुखिया से भी प्रार्थना पत्र के माध्यम से की गई थी,
इस शिकायत को सूबे के मुखिया ने अपने संज्ञान में लेते हुए संबंधित जिलाधिकारी को प्रेषित किया था, जिलाधिकारी महोदय के द्वारा जांच कराने पर कई बड़ी कमियाँ पाईं गईं, मगर अफसोस कोतवाली महमूदाबाद में एफआईआर तब दर्ज कराई गई, जब वह सारा कार्य फाइनल हो गया, अब बिधि व्यवस्था के तहत न्यायिक जांच की जाये तो इस भृष्टाचार में अभी कई प्रतिष्ठित अधिकारियों के साथ साथ और भी चेहरे सामने आ सकते हैं,
जो जानकारी सूत्रों से मिली है उस जानकारी को आप सभी से साझा करते हुए बताने का प्रयास कर रहा हूँ, जब इस मामले को लेकर प्रधान से बात की गई तो उस प्रधान ने नाम न छापने और जनता के बीच नाम न बताने का वादा करते हुए जो जानकारी दी, तो उस जानकारी के मुताबिक ब्लाक के खण्ड विकास अधिकारी साहब से लेकर ब्लाक में कार्यरत संबंधित अधिकारी व कर्मचारी भी तो कमीशन लेते हैं, जब प्रधान, सचिव, टी आई, रोजगार सेवकों जैसों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है, तो क्या अवर अभियन्ता व उनके असिस्टेंट, खण्ड विकास अधिकारी साहब क्या दूध के धुले हैं, क्या यह सब ग्राम प्रधानों से कमीशन के नाम पर घूसखोरी नहीं करते, जबकि सूत्रों की मानें तो जब कोई प्रधान अपनी ग्राम पंचायत में कोई भी विकास कार्य कराने के लिए फाइल कम्पलीट करवाता है, बस उस जगह से कमीशन खोरों की नीयतें बदलने लगती हैं, और इन कमीशन खोरों की नीयतें तब तक शांत नहीं हो जातीं जब तक उनकी जेब में कमीशन की रकम नहीं आ जाती,
आपको बताते चलें कि ब्लाक के सभी अधिकारी, कर्मचारी एक ही बार कमीशन लेते हैं, मगर ब्लाक महमूदाबाद के खण्ड विकास अधिकारी साहब दो बार कमीशन लेते हैं, अब ऐसी स्थिति में ग्राम पंचायत प्रधान क्या करे, अगर अपने क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं करवा रहा है, तो ग्राम पंचायत के नागरिक ताना मारते हैं, अगर प्रधान अपनी ग्राम पंचायत में कोई विकास कार्य करवाता है तो ब्लाक महमूदाबाद में बैठे भूखे भेड़िये अपना मुंह फैलाये खड़े हैं,
सूत्रों की मानें तो खण्ड विकास अधिकारी के द्वारा फाइल बनने पर 7.5%, इतना कमीशन,
टी0 ए महोदय 5%, इतना कमीशन, सचिव 5%, इतना कमीशन, रोजगार सेवक 5%, इतना कमीशन, अन्य उच्च अधिकारी 7.5%, इतना कमीशन, कार्य संपूर्ण होने के पश्चात 5% खण्ड विकास अधिकारी को फिर देना पड़ता है ग्राम पंचायत प्रधान को, अब अगर भारत के संविधान के आर्टिकल्स के मुताबिक चला जाये तो कमीशन/ घूस देने वाला जितना जिम्मेदार है तो उतना ही कमीशन/ घूस लेने वाला भी तो जिम्मेदार है, तो फिर उच्चाधिकारी ने एक पक्षीय एफआईआर क्यों दर्ज कराई, क्या सिर्फ जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है क्या वही जिम्मेदार है, कोई और नहीं,
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रायबरेली ब्रजेश त्रिपाठी
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