राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य जी की राजनीति पर खादिम अब्बास का बेबाक नजरिया         साहब सिंह धनगर भैया जी का त्याग और बलिदान लाएगा रंग,समय का करना पड़ेगा इंतजार


राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य जी की राजनीति पर खादिम अब्बास का बेबाक नजरिया

        साहब सिंह धनगर भैया जी का त्याग और बलिदान लाएगा रंग,समय का करना पड़ेगा इंतजार

         माली की ना समझ नादानी व लापरवाही से बगिया के फूल मुरझा गए,आइ डी ए का झंडा उठाने की नहीं पड़ी हिम्मत

       अपनी खोज हुई राजनैतिक शक्ति और प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए स्वामी जी करें पारदर्शिता के हथियार का करें इस्तेमाल

      चौबे जी गए थे छवे बनने के लिए बन गए दूबे,गलती कहां हुई इसका स्वयं करें आत्म चिंतन और मनन

        मौर्य जी व्यक्ति नहीं विचार हैं, देश में सबसे चर्चित व्यक्ति क्यों हो गया वर्तमान की राजनीति में धराशाई इसकी वजह जाने स्वामी जी : खादिम अब्बास

           मौर्या आ रहे हैं ,मोदी जा रहे हैं का यह प्रयास 2024 के चुनाव में न हो सका सफल लेकिन 2027 के विधानसभा के चुनाव में यह नारा हो सकता है साकार ,स्वामी आ रहे हैं, योगी जा रहे हैं इस मुहिम को साकार करने के लिए मौर्या जी को दिखानी होगी दृढ़ इच्छा शक्ति, अभी से कर दें तैयारी शुरू
       
        स्वामी प्रसाद मौर्य हैं एक अनुभवी नेता, थोड़ी सी करें प्रतीक्षा राजनीति किन्तु परंतु से नहीं साधना से चलती है :शेखर यादव

          समय के साथ न चलने वाले गुमनामी में खो जाते हैं मौर्या जी संघर्ष जारी रखें भविष्य उज्जवल है: डॉ एस अकमल

         मौर्या जी के पास खोने के लिए कुछ नहीं पाने के लिए संसार पड़ा है पुराने तेवर अपनाए और राजनीति पर छा जाएं: रमेश प्रजापति
          कांशीराम के वैज्ञानिक फार्मूले से ही सांप्रदायिकता वादी शक्तियों को किया जा सकता है परास्त मौर्या जी काशीराम के मिशनरी साथियों को करें एकत्रित और माला के धागे में एक दूसरे को पिरोकर संघर्ष का करें ऐलान

        भिक्षा भीख का कटोरा आगे करके मांगी जाती है कटोरा पीछे छुपा कर नहीं वैचारिक संघर्ष संघ व भाजपा से नहीं कर सकती है राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जोड़ी मुसलमानो का मुख से नाम लेने से डरते हैं यह दोनों नेता

       निजीकरण हटाओ के आंदोलन से नरेंद्र मोदी,राहुल गांधी और अखिलेश यादव तीनों को किया जा सकता है बेनकाब

     कांशीराम कहते थे पहले हारेंगे फिर हराएंगे और फिर जीतेंगे इस मारक विचार से मौर्या जी लें सबक

       इटावा ।2024 के लोकसभा के परिणाम आने से सभी राजनेताओं की असलियत आम जनता के सामने आ गई है यह चुनाव किसी पार्टी ने नहीं बल्कि जनता ने स्वयं लड़ा है प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में सरकारी विभागों का निजीकरण करके भारतीय संविधान पर कुठाराघात करने का विश्वास घात किया था उन्होंने एक झटके में सरकारी विभागों का निजीकरण करके दलित ,पिछड़े समाज को उनके मूल अधिकारों से वंचित करके उनके पढ़े-लिखे नौजवानों का गला घोटते हुए इन होनहारों  को आरक्षण से वंचित करके उन्हें जिंदा लाश बनाकर अपने राजनैतिक ताबूत में खुद अपने हाथों से आखरी कील ठोक दी थी लेकिन इसका सबसे दुखद पहलू यह रहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संविधान विरोधी बेजा हरकत के विरुद्ध विपक्षी पार्टियों का एक भी नकारा और निकम्मा नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस ओछी और संविधान विरोधी हरकत के विरुद्ध मोदी को बेनकाब करने और उनको नकेल डालने के लिए सड़कों पर नहीं उतरा इसलिए मोदी अपनी इस दुस्साहस भरे फैसले को लागू करने में सफल हो गए लेकिन विपक्ष इसके बावजूद भी कंधे उचकाकर हाथ मटका कर इधर-उधर की बेमतलब बातें वह करता रहा लेकिन उसने नरेंद्र मोदी को बेनकाब करने और उनकी चूलें हिलाकर उन्हें सत्ता से बेदखल करने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किया यह विपक्ष की हरकत सभी देशवासियों के सामने है कि किसके कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार देश का प्रधानमंत्री बनने में सफल हो गए।
           उल्लेखनीय है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपरोक्त बेजा हरकत के खिलाफ बौद्धिक वर्ग चाहे वह किसी धर्म जाति व वर्ग का रहा हो उसने समझ लिया की लोहा गरम है उस पर चोट मारी जाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तानाशाह हुकूमत का तख्ता पलट दिया जाए जिस तरीके से 2 अप्रैल 2018 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के विरोध में मौन क्रांति हो गई और सामाजिक संगठनों ने उस फैसले के विरोध में ऐसी मारक मुहिम चलाई की सरकार को एक जूटता का विरोध प्रदर्शन करके उक्त निर्णय को संसद से निष्प्रभावी करके एक इतिहास रच दिया था यह नजीर सबके जेहन में भी नरेंद्र मोदी के निजीकरण के मनमाने फैसले से आरक्षण से वंचित किया गया समाज लामबंद होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदखल करने के लिए बेताब था वह सिर्फ मौके की तलाश में था कि कब लोकसभा के चुनाव हो और वह अपनी तबाही व बर्बादी का बदला संविधान ,आरक्षण और लोकतंत्र विरोधी प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से अपदस्त करके ले ले । उसके मन व मस्तिष्क में ज्वालामुखी की तरह लावा धड़क रहा था लेकिन देश का कोई विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बेजा हरकत के विरुद्ध सड़कों पर उतरने के लिए तैयार नहीं था। बसपा सुप्रीमो मायावती पहले से ही इस अहम मुद्दे पर पीठ दिखाकर भाजपा के शीर्ष नेताओं की गोद में बैठ चुकी थी कांग्रेस के राहुल गांधी और सपा के अखिलेश यादव ने संघर्ष करने और जोखिम उठाने की दम नहीं थी यहां तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस मोर्चे पर असफल साबित हुई प्रधानमंत्री के लिए नरेंद्र मोदी के विरुद्ध नीतीश कुमार को मैदान में उतारने की चर्चा तो चली लेकिन वह भी दुम दबाकर पतली गली से मैदान छोड़कर निकल गए नाम तो मल्लिका अर्जुन खड़गे व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी चला परंतु यह नाम भी हवा में गुम हो गए इंडिया गठबंधन किसी का नाम प्रधानमंत्री के लिए घोषित करने की हिम्मत नहीं जुटा सका और बिना दूल्हे के बारात लेकर चल दिया आरक्षण समर्थकों के मन में आक्रोश और उत्साह दोनों थे लेकिन वह इस कसौटी पर लाचार की स्थिति में बना हुआ था उसे विपक्ष के नेताओं ने हर मोर्चे पर निराश किया और वह मन मसोस कर रह गया इससे देश का बुद्धिजीवी वर्ग चिंतित था कि इस विषम परिस्थिति में मोदी के विरुद्ध किस चेहरे को लाया जाए तमाम नाम की चर्चा चली कि प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध कोई ऐसा नाम लाया जाए जो वैचारिक रूप से परिपक्व होने के साथ चर्चित हो ले देकर सबकी सूई पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के नाम पर टिक गई इस आशा की किरण को साकार रूप देने के लिए संस्कार संस्था के राष्ट्रीय संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार शेखर यादव ,व इंसानी भाईचारा बनाओ समिति के राष्ट्रीय संरक्षक व इस्लाम पार्टी हिंद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ एस अकमल, अति पिछड़ा महासंघ के राष्ट्रीय संरक्षक रमेश प्रजापति और मान्यवर कांशीराम के अभिन्न साथी तथा उनके इटावा लोकसभा के चुनाव प्रभारी रहे कौमी तहफ्फूज कमेटी के संयोजक तथा सियासी अखाड़ा के संपादक खादिम अब्बास ने राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संस्थापक आई डी ए के संयोजक साहब सिंह धनगर भैया जी से संपर्क साधा गया जो स्वामी प्रसाद मौर्य को अपनी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहते थे उनसे मंत्रणा हुई कि आप अपनी पार्टी का एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन दिल्ली के ताल कटोरा स्टेडियम में करने जा रहे हैं उसी दिन एक ऐसा धमका कर दिया जाए ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा जा सके साहब सिंह धनगर भैया जी 22 फरवरी 2024 के अधिवेशन में इतने व्यस्त रहे कि स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम व चेहरा के साथ उनकी चर्चित छवि को लेकर उनसे किसी भी प्रकार की नीतिगत चर्चा नहीं हुई स्वामी प्रसाद का चेहरा चर्चित होने के साथ उनका काछी समाज देश भर में अच्छी संख्या में शाक्य ,सैनी कुशवाहा और मौर्य के नाम से जाना जाता है और वह तथागत के पंचशील का उपासक होने के साथ पिछड़ों की राजनीति में अपना अच्छा खासा प्रभाव रखता है यह सब बातें होनी थी जो नहीं हो सकी जिसके कारण मामला निर्णायक स्थिति में  नहीं पहुंच सका दिल्ली के ताल कटोरा स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के मंच पर विभिन्न दलों और सामाजिक संगठनों के राष्ट्रीय नेता बड़ी संख्या में मंच पर जुटे।
         साहब सिंह धनगर भैया जी ने कार्यक्रम का संचालन कर रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के अति विश्वास पात्र आर के मौर्य से कहा की खादिम अब्बास का संबोधन कराइए खादिम ने माइक थामते हुए कहा कि विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरा और सहमा हुआ है लेकिन हमारे पास इस समय देश व दुनिया में वैचारिक रूप से चर्चित स्वामी प्रसाद मौर्य हैं , जो किसी भी परिचय के मोहताज नहीं है वह संघर्षशील होने के साथ तथागत बुद्ध के मिशन के ध्वजवाहक के साथ मान्यवर कांशीराम के पाठशाला के जुझारू विद्यार्थी हैं इस मंच से यह घोषणा की जाए की आई डी ए (इंडियन डेमोक्रेटिक एलायंस) राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद को प्रधानमंत्री का चेहरा बनाएगा खादिम अब्बास की इतनी घोषणा भर से ताल कटोरा स्टेडियम  तालिया की गड़गड़ाहट से गूंज गया खादिम ने उपस्थित जनों से कहा गांव गली खेत वह खलियान में यह संदेश फैला दो कि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर स्वामी प्रसाद मौर्य आ रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी जा रहे हैं इस उद्बोधन को सुनकर ताल कटोरा में उपस्थित सभी नौजवान थिरकने लगे यदि प्रस्ताव पर 22 फरवरी 2024 को तालकटोरा में मोहर लग जाती तो देश की राजनीति का रूप व हवा बदलने में देर नहीं लगती क्योंकि इंडिया गठबंधन अपने प्रधानमंत्री के नाम की घोषणा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था मंच पर ही खादिम के सुर में सुर मिलाते हुए इंसानी भाईचारा बनाओ समिति के राष्ट्रीय संरक्षक व इस्लाम पार्टी हिंद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ एस अकमल ने भी पुरजोर जज्बाती तकरीर करके स्वामी प्रसाद मौर्य की खूबियों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि इस समय , समय की आवश्यकता मौर्य जी हैं यहां से संदेश जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी एवं आइ डी  ए (इंडियन डेमोक्रेटिक एलायंस) ही सत्ता से बेदखल कर सकता है डॉ अकमल ने कहा कि समय के साथ न चलने वाले गुमनामी में खो जाते हैं मौर्य जी संघर्ष जारी रखें उनका राजनीतिक भविष्य उज्जवल है उन्होंने कहा कि मान्यवर कांशीराम के वैज्ञानिक फार्मूले से ही सांप्रदायिकता वादी शक्तियों को परास्त किया जा सकता है उन्होंने कहा कि भीख मांगने से मिलती है अधिकार छीने जाते हैं मोदी को सत्ता से बेदखल करने का यही सही समय है इसके अलावा अन्य वक्ताओं ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य की शान में कसीदे पढे और कहा के स्वामी जी स्वयं निर्णय करें आगे उन्हें क्या करना है अगर उसी दिन स्वामी प्रसाद मौर्य उस मंच से कह देते कि हम लोकसभा का चुनाव कुशीनगर से लड़ेंगे तो राजनीतिक क्षेत्र में प्रलय हो जाती पता नहीं स्वामी प्रसाद मौर्य जी ने अपने मन की बात करने से उस मंच पर क्यों ठिठक गए अगर उन्हें कुशीनगर से चुनाव लड़ना था तो उन्हें चुनाव लड़ने की जवां मर्दी दिखानी चाहिए थी।
         स्वामी प्रसाद मौर्य ने जाने अनजाने में राजनीतिक क्षितिज पर पहुंचने का एक सुनहरा अवसर गवां दिया जो लोग वक्त की नजाकत और समय की रफ्तार नहीं समझते वह चौराहे पर खड़े रह जाते हैं यदि स्वामी प्रसाद ने कुशीनगर से उस दिन चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी होती तो उनका चुनाव आंधी और तूफान बन जाता । गरम लोहे पर चोट मारो उसे जैसा चाहो अपनी मन मर्जी के आधार पर उसे ढाल लो। ठंडे लोहे पर चोट करने से क्या होता है ? मौर्य जी को एक और बात भविष्य की राजनीति के लिए याद रखनी पड़ेगी वह यह है कि संगठन में शक्ति होती है और शक्ति की पूजा होती मौर्य जी दाई से पेट नहीं छुपाया जाता है?  जो पारदर्शिता पर भरोसा करते हैं वह सब के विश्वास पात्र होते हैं उनकी स्थिति मन की गांठे न खोलने से आज यह हो गई कि न खुदा ही मिला न विशाल ए सनम न इधर के रहे न उधर के रहे कहावत वही हो गई है कि चौबे जी गए थे छ्वे बनने लौटे तो दुबे रह गए , मौर्य जी ऊंट की चोरी न्योरे न्यौरे नहीं होती। पता नहीं है कि राजनीतिक की निर्णायक घड़ी में और कौन सी राजनीति कर रहे हैं इस ढुलमुल नीति से आपका सामाजिक और राजनीतिक वैभव घट रहा है और राजनीति की चमक दमक समाप्त हो रही है भीख मांगने वाला भिखारी कभी भीख का कटोरा पीछे नहीं छुपाता जब वह अपना आचरण ऐसा रखेगा उसे भिक्षा कौन देगा आप उस बगिया के (आई डी ए) के मालिक थे जिसमें लगभग डेढ़ दर्जन छोटे राजनैतिक दल थे उन घटक दलों के जिसमें पूर्व सांसद प्रोफेसर रामबक्स वर्मा, मेजर अमर सिंह चौहान, प्रोफेसर सुलेमान अहमद, शिव प्रसाद यादव, रमेश प्रजापति आदि तमाम राजनैतिक हस्तियों के साथ  पूर्व जिला जज बी डी नकवी,सीनियर आईएएस हरिश्चंद्र जैसी अनगिनत अनुभवी विभूतियां शामिल थी मौर्य जी आप भी कमाल के व्यक्ति हैं इस सब के बावजूद भी आज भी आपका राजनीति में कुछ बिगड़ा नहीं है क्योंकि आप एक विचारवान संघर्षशील समाजिक योद्धा है आपके पास खोने के लिए कुछ नहीं पाने के लिए जमाना पड़ा है।
           मौर्य जी को एक और बात भविष्य की राजनीति के लिए याद रखनी पड़ेगी वह यह है कि धोखे की राजनीति कभी परवाह नहीं चढ़ सकती मौर्य जी इस सवाल का जवाब तो सिर्फ आप ही दे सकते हैं तालकटोरा के अधिवेशन के बाद आपने किसके सलाह मशविरा के बाद यह घोषणा कर दी कि आप इंडिया गठबंधन को मजबूत करेंगे यह कहकर राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी एवं आई डी ए को आगे न बढाने का इरादा छोड़कर इंडिया गठबंधन के नेताओं के यहां दस्तक देना शुरू कर दिया यहीं से आपके पराभव की नींव रख गई मौर्य जी आपने पार्टी बढ़ाने का इरादा छोड़कर इंडिया गठबंधन के नेताओं के यहां दस्तक देना शुरू कर दिया वहां से भी आपको निराशा हाथ लगी।
          मौर्य जी आप यह बात क्यों भूल गए थे कि इंडिया गठबंधन में सबसे पावरफुल व्यक्ति अखिलेश यादव थे जिनकी पार्टी सपा से आपने राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दिया उसके बाद आपने एमएलसी पद भी छोड़ दिया ऐसी स्थिति में अखिलेश यादव आपको क्यों इंडिया गठबंधन में शामिल हो जाने देते । मौर्य जी अखिलेश यादव ने अपने दरवाजे पर खड़ा करके आपसे सारे पुराने हिसाब किताब चुकता करके आप जैसे नेता को ठेंगा दिखा दिया मौर्य जी इस घटनाक्रम का दोष आप किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं दे सकते। खादिम अब्बास जैसे हजारों सामाजिक कार्यकर्ता इसलिए आपके पक्ष में खड़े हो गए थे कि आप एक स्वाभिमानी व्यक्ति होने के साथ एक ऊर्जावान विचारक हैं और मान्यवर कांशीराम के चेले है इन्हीं तमाम खूबियों के कारण लोगों ने प्रभावित होकर ताल कटोरा के मंच से कहा था कि स्वामी प्रसाद मौर्य एक व्यक्ति नहीं विचार है मौर्य जी आप अपने आप को सार्वजनिक मंचों से  कांशीराम का चेला व उनकी पाठशाला का अपने आपको विद्यार्थी बताते थे यह बात खादिम अब्बास सहित सभी लोगों को बहुत अच्छी लगती थी मौर्य जी खादिम अब्बास यहां एक बात आपको बताता चले कि खादिम अब्बास उन पूर्व विधायक प्रोफेसर सहदेव सिंह का शागिर्द है जिन्होंने सन् 1962 व1967 में डॉ राम मनोहर लोहिया की सोशलिस्ट पार्टी व संतोपा से दो बार विधायकी का चुनाव इस नारे के साथ साइकिल पर चढ़कर चुनाव जीता था पन्द्रह लूट करे खासी जागो जागो रे पचासी। मान्यवर कांशीराम समाजिक योद्धा पूर्व विधायक प्रोफेसर सहदेव सिंह यादव जी से सामाजिक व राजनीतिक शिक्षा के साथ टिप्स लेने के लिए पंजाब से चलकर इटावा उनके निवास स्थान पर आते थे और उन्होंने इटावा को अपनी कर्मस्थली बनाया यहां के मिशनरी साथियों ने कांशीराम जी को इटावा लोकसभा क्षेत्र से उपचुनाव जिताकर संसद में पहली बार भेजने का गौरव हासिल किया उस चुनाव का खादिम अब्बास चुनाव प्रभारी था 1982 में फर्रुखाबाद की तहसील कायमगंज में जो अंबेडकर जयंती का कार्यक्रम बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर के साथी रहे सादिक नवाब खान ने 14 अप्रैल 1982 में कराई थी उस मंच पर देश भर के तथागत तथा अंबेडकर व कबीरपंथी मनीषियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया था उस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक प्रोफेसर सहदेव सिंह यादव ने की थी उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में मान्यवर कांशीराम को बहुजन नायक की उपाधि से सुशोभित किया उसी मंच पर पहली बार मान्यवर कांशीराम व खादिम अब्बास ने एक साथ मंच साझा किया और अपने विचार व्यक्त किए  उस समय मायावती नामक चिड़िया का कोई आता पता नहीं था बहुजन समाज पार्टी का जन्म 14 अप्रैल 1984 में मान्यवर कांशीराम ने दिल्ली में कांस्टीट्यूशनल क्लब और बूट क्लब के मैदान में किया था यह बात स्वामी प्रसाद मौर्य जी आपके संज्ञान में इसलिए डाली जा रही है कि मान्यवर कांशीराम के वैज्ञानिक हथियार पन्द्रह पचासी के फार्मूले से ही सांप्रदायिकता वादी शक्तियों को परास्त किया जा सकता है कि आपकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि आप कांशीराम के बगिया के मिशनरी बिखरे फूलों को एकत्रित करें और 2027 के विधानसभा की तैयारी में अभी से जुट जाएं मौर्य जी चुनाव में नारों का बहुत महत्व होता है जब कांशीराम को इटावा से लोकसभा का चुनाव लड़ाया गया था उस समय राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद का आंदोलन चल रहा था खादिम अब्बास ने इटावा वीआईपी के मैदान में मान्यवर कांशीराम की उपस्थिति में नारा दिया था। बाकी राम झूठे राम सच्चे राम काशीराम। बाकी राम नकली राम असली राम काशीराम।।  तम्बू,तम्बू में बम्बू, बम्बू में रस्सी , रस्सी में खूंटा। यह नारे मान्यवर कांशीराम के चुनाव के लिए वरदान बन गए और उन्होंने इटावा लोकसभा के भाजपा के लाल सिंह वर्मा एडवोकेट, कांग्रेस पार्टी के पूर्व सांसद शिव शंकर तिवारी जो हाई कोर्ट के बहुत बड़े अधिवक्ता थे और मुलायम सिंह यादव की पार्टी के तीन बार के सांसद रहे राम सिंह शाक्य को पराजित करके विजय श्री प्राप्त की उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे मौर्य जी मुलायम सिंह यादव को जसवंत नगर विधानसभा से चुनाव जीतने में बहुत बड़ा हाथ मान्यवर कांशीराम का है उन्होंने इस चुनाव में अपने संसदीय क्षेत्र में पड़ने वाली जसवंत नगर विधानसभा से जहां मुलायम सिंह का नार गड़ा हुआ है उन्होंने अपने मंचों से दलित मतदाताओं से कहा था कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने मुलायम सिंह यादव की मुख्यमंत्री की कुर्सी छीन ली है कि अब वह नहीं चाहते कि मुलायम सिंह सदन में विधायक बनकर पहुंचे ।  बसपा ने अपना प्रत्याशी जसवंतनगर से नहीं उतरा है ताकि मुलायम सिंह को चुनाव जिताया जा सके इसलिए ऊपर वाला वोट लोकसभा में हमें हाथी के निशान पर दें और नीचे वाला वोट मुलायम सिंह यादव के हलधर किसान पर मोहर लगाकर दें।  यह बात कांशीराम जी ने जनसभा जसवंत नगर विधानसभा में पडने वाली टमेरी गांव में कही थी जिसके कारण मुलायम सिंह को विधायक बनने का अवसर प्राप्त हुआ । मौर्य जी यह बात भी आपके संज्ञान में ला दें कि जब 1993 में सपा बसपा का गठबंधन हुआ तब दोनों दलों की पहली जनसभा मैनपुरी के क्रिश्चियन कॉलेज के मैदान में हुई थी उसमें खादिम अब्बास, मान्यवर कांशीराम, मुलायम सिंह यादव, पूर्व विधायक बाबा रामनाथ की उपस्थिति में मंच से नारा दिया था कि मिले मुलायम कांशीराम हवा में उड़ गए जय श्री राम, बाकी राम झूठे राम ,सच्चे राम काशीराम । खादिम के साथ लाल सिंह लोधी पीटीआई, चंद्रभान सिंह काछी और देवेंद्र यादवऔर रमेश प्रजापति ने भी इस नारे का उद्घोष किया और यह नारा सपा और बसपा के गठबंधन के लिए वरदान साबित हुआ अपने वादे के मुताबिक मान्यवर कांशीराम ने मुलायम सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया।
          मौर्य की तीसरी बार नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बन जाने के बाद सारे धर्मनिरपेक्षता के पक्षधर लोगों की आशा की किरण आप बन गए हैं लोकसभा के चुनाव तो हो गए अब उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं अब यह फैसला मौर्य जी आपको लेना है कि आप  आई डी ए गठबंधन के संयोजक साहब सिंह धनगर भैया जी ने आपको शिखर पर बनाए रखने के लिए आपको अपनी पार्टी राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है उस आइ डी ए गठबंधन बारात काआप दूल्हा बनेंगे या पालकी के कहांर खादिम अब्बास व डॉ एस अकमल के साथ तमाम दलों के नेता व धर्मनिरपेक्षता के पक्षधरों ने 2027 की विधानसभा के चुनाव से पूर्व आपको शून्य से शिखर तक पहुंचाने के लिए पूर्व में यह नारा गढ़ लिया है कि स्वामी आ रहे हैं, योगी जा रहे हैं । इस नारे को सार्थकता प्रदान करने के लिए आपकी नैतिकता,ईमानदारी और दृढ़ इच्छा शक्ति की परीक्षा होनी है वरिष्ठ पत्रकार शेखर यादव के इस मत से सभी सहमत हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य जी एक अनुभवी नेता हैं उनकी रणनीति और कार्य शैली की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
            स्वामी प्रसाद मौर्य जी आप कुशीनगर में क्यों पराजित हुए हैं इसकी समीक्षा आपने की हो या न की हो आपके शुभचिंतकों ने आपकी हार की समीक्षा कर ली है आप चुनावी माहौल नहीं भाप पाए 22 फरवरी 2024 के बाद आपको अच्छा खासा समय कुशीनगर लोकसभा को तैयार करने के लिए मिला लेकिन उस समय का सदुपयोग आपने नहीं किया आपने समय रहते हुए भी आई डी ए के घटक दलों को कुशीनगर लोकसभा संसदीय क्षेत्र में नहीं लगाया जब उनका सदुपयोग कर लिया जाता तो बड़े आसानी से कुशीनगर लोकसभा से आप चुनाव जीत सकते थे। आपने आखिरी  समय में ए आई एम आई एम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मान्यवर असदुद्दीन ओवैसी ,पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मोहम्मद अय्यूब तथा आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर जी ने वहां आपके पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया काश इससे पहलेआपने सामाजिक दर्शन के विचारक चिंतक डॉ एस अकमल साहब का इस्तेमाल किया गया होता तो निश्चित रूप से कुशीनगर संसदीय क्षेत्र का माहौल मौर्या मय हो जाता आपके नामांकन के समय अकमल साहब ने जो बुनियादी तकरीर की थी उससे समाज में एक नया संदेश गया था उसका लाभ इस चुनाव में नहीं उठाया जा सका जबकि साहब सिंह धनगर भैया जी के साथ उन्होंने कई दिन कुशीनगर में बिताए अगर चुनाव की बागडोर संभालने वाले लोगों ने उनके संसदीय क्षेत्र में नुक्कड़ सभाओं का आयोजन करा दिया होता तो वहां की धरती मौर्या की जीत की गवाह बन जाती। 
          मौर्या जी को ज्ञात होना चाहिए कि अखिलेश यादव ने अपनी हटवादिता और खुन्नस का प्रदर्शन करते हुए नगीना लोकसभा से चंद्रशेखर आजाद को इंडिया गठबंधन का प्रत्याशी नहीं होने दिया जबकि वहां का मुस्लिम मतदाता चाहता था कि चंद्रशेखर आजाद को इंडिया गठबंधन नगीना लोकसभा से प्रत्याशी बनाए उनकी बात न मानने का नतीजा यह निकला की वहां के मुस्लिम मतदाताओं ने चंद्रशेखर आजाद को एकतरफा वोट देकर उन्हें चुनाव भारी मतों से जीता दिया यह बात अपने आप में महत्वपूर्ण है कि मुस्लिम समाज ने पूरे देश व प्रदेश में इंडिया गठबंधन को वोट दिया लेकिन नगीना लोकसभा संसदीय क्षेत्र में चंद्रशेखर आजाद को एक तरफा वोट देकर इंडिया गठबंधन प्रत्याशी को हराकर इतिहास रच दिया यही स्थिति कुशीनगर में हो सकती थी यदि चुनाव की रणनीति सही बनाई जाती वहां पर आई डी ए के बड़े-बड़े दिग्गज नेता विचरण करते रहे लेकिन उनका किसी भी प्रकार का उपयोग नहीं किया जा सका यह भी एक स्वामी प्रसाद मौर्य की चुनाव हारने की प्रमुख वजह रही उल्लेखनीय है कि अखिलेश यादव की बचकानी हटधर्मी लड़कपन व ढुलमुल राजनीति से उत्तर प्रदेश का मुसलमान सहमत नहीं है उसे एक विकल्प की तलाश है यह विकल्प स्वामी प्रसाद मौर्य बन सकते हैं क्योंकि वह फायर ब्रांड नेता हैं वह सबको अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं 2027 का होने वाला उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अपने आप में स्वामी प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में एक नया इतिहास रच सकता है और योगी को आसानी से परास्त किया जा सकता है यह वह इबारत है जिसे धर्मनिरपेक्षता के पक्षधरों ने पढ़ लिया है । अगर यह नारा अभी से बुलंद किया जाए कि सांप्रदायिकता वादी शक्तियों को परास्त करने के लिए स्वामी प्रसाद मौर्या आ रहे हैं और योगी जा रहे हैं। तब अपने आप उत्तर प्रदेश की राजनीति करवट ले लेगी और उन नेताओं का असली चेहरा सामने आ जाएगा जो भाजपा का डर दिखाकर मुसलमानो का वोट लेकर अपना राजनैतिक उल्लू सीधा कर रहे हैं सर्वविदित है कि मुस्लिम वोट के ही कारण अखिलेश यादव की राजनीति परवान चढ़ती है उनके पी डी ए में मुसलमानो की कोई भी भागीदारी नहीं है वह लोग जो मुसलमानो का  नाम लेने से डरते व हिचकते हो ऐसे बहुरूपये नेताओं से संविधान ,लोकतंत्र और आरक्षण बचाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इन सब मसलो पर स्वामी प्रसाद मौर्य को गौर व फिक्र करना चाहिए तथा सरकारी विभागों का किया गया निजीकरण के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए सड़कों पर उतर आना चाहिए भाजपा को बल प्रदान करने वाले नेताओं की कलाई अपने आप खुल जाएगी यह वह लोग हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरकारी विभागों का निजीकरण करने के उपरांत संविधान की आत्मा पर जो कुठाराघात किया गया उसके विरुद्ध उपरोक्त सपा बसपा व कांग्रेस के नेताओं ने सड़क पर उतरकर निजीकरण के विरोध में आज तक न धरना दिया न ही प्रदर्शन किया इस आंदोलन को शून्य से शिखर पर ले जाने के लिए स्वामी प्रसाद मौर्य को कमरकस के सड़क पर आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उन सभी नेताओं को बेनकाब और कटघरे में खड़ा करने के लिए एक सूत्री आंदोलन चलाना होगा कि सरकारी विभागों का किया गया निजीकरण समाप्त किया जाए।

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