UP: राशन कार्ड में दर्ज प्रत्येक सदस्य का सत्यापन जरूरी, गलत तरीके से लाभ लेने वालों के कटेंगे नाम
UP: राशन कार्ड में दर्ज प्रत्येक सदस्य का सत्यापन जरूरी, गलत तरीके से लाभ लेने वालों के कटेंगे नाम
लोकसभा चुनाव में यूपी में दलित वोटों के बिखराव ने सपा और भाजपा दोनों ही दलों को बराबर का फायदा पहुंचाया। बसपा प्रत्याशियों ने कई सीटों पर एडीए और इंडिया का गणित बिगाड़ दिया। 23 सीटों पर भाजपा को फायदा हुआ तो 22 पर विपक्षी गठबंधन सफल रहा।
लोकसभा चुनाव में दलित वोटबैंक ने एनडीए और इंडिया यानी दोनों को बराबर फायदा पहुंचाया। चुनाव नतीजों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि भाजपा को करीब 23 सीटों पर दलित वोटबैंक के बिखराव ने जीत दिलाई, तो दूसरी ओर सपा-कांग्रेस गठबंधन को 22 सीटों पर फायदा हुआ।Trending
पहले चरण के चुनाव से शुरुआत करें तो सहारनपुर सीट पर बसपा प्रत्याशी को 1,80,353 वोट मिले। जिसकी वजह से भाजपा के राघव लखनपाल को करीब 65 हजार वोटों से हारना पड़ा। कांग्रेस के इमरान मसूद को 5,47,967 वोट मिले, जबकि भाजपा के राघव लखनपाल को 4,83,425 वोट मिले।
इसी तरह मुजफ्फरनगर में बसपा प्रत्याशी दारा सिंह प्रजापति ने 1,43,707 वोट हासिल किए। यही केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान की करीब 24 हजार वोटों से हार का कारण बना।
सपा प्रत्याशी हरेंद्र सिंह मलिक 4,70,721 वोट पाए, जबकि संजीव बालियान को 4,46,049 वोट मिले। बदायूं में सपा प्रत्याशी आदित्य यादव ने भाजपा के दुर्विजय सिंह शाक्य को करीब 35 हजार वोटों से हराया। यहां बसपा प्रत्याशी मुस्लिम खान को 97,781 वोट मिले।
विपक्षी गठबंधन को इन सीटों पर भी मिला फायदा
बसपा प्रत्याशियों को मिले वोट से सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशियों की जीत का संभल, एटा, खीरी, धौरहरा, इटावा, मोहनलालगंज, जालौन, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, लालगंज, जौनपुर, मछलीशहर, सलेमपुर, घोसी, गाजीपुर और चंदौली में रास्ता प्रशस्त होता चला गया।
इस तरह भाजपा प्रत्याशियों को मिला फायदा
बसपा का दलित वोट बैंक में बिखराव रोक पाने में नाकामी का फायदा भाजपा को करीब 23 सीटों पर हुआ। बसपा प्रत्याशियों को इनमें से 13 सीटों पर एक लाख से कम वोट मिले, जिससे भाजपा प्रत्याशी की जीत की राह आसान हो गई।
पीलीभीत में बसपा प्रत्याशी को महज 83,697 वोट मिले, जिससे भाजपा के जितिन प्रसाद 1.65 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल करने में कामयाब रहे। जितिन प्रसाद को 6.07,158 वोट, जबकि सपा प्रत्याशी भगवत सरन गंगवार को 4,42,223 वोट मिले।
गाजियाबाद में बसपा प्रत्याशी नंदकिशोर पुंडीर ने करीब 80 हजार वोट हासिल किए। बड़ी संख्या में दलित वोट भाजपा को गया, जिससे अतुल गर्ग 8,54,170 मत पाकर जीत गए। वहीं कांग्रेस की डॉली शर्मा को 5,17,205 वोट मिले।
आगरा में बसपा प्रत्याशी पूजा अमरोही ने 1,76,476 वोट हासिल किए, जो सपा प्रत्याशी की हार का कारण बन गया। आगरा में भाजपा के एसपी सिंह बघेल को 5,99,397 वोट, जबकि सपा के सुरेश कर्दम को 3,28,103 वोट ही मिले। बरेली में बसपा प्रत्याशी के चुनाव मैदान से बाहर जाने का सीधा फायदा भाजपा को मिला और दलित वोट की बदौलत 5,67,127 वोट पाकर जीत गए। सपा के प्रवीन सिंह ऐरन को 5,32,323 वोट से संतोष करना पड़ा।
यहां भाजपा भारी
बुलंदशहर, मथुरा, हाथरस, शाहजहांपुर, मिश्रिख, हरदोई, उन्नाव, फर्रुखाबाद, अकबरपुर, बहराइच, झांसी, कैसरगंज, डुमरियागंज, भदोही, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया और बांसगांव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को शिकस्त दिलाने में बसपा प्रत्याशियों की अहम भूमिका नजर आती है।
सेंधमारी रोकना बड़ी चुनौती
दूसरी ओर बसपा का विकल्प बनकर उभर रही आजाद समाज पार्टी की दलित वोटबैंक में सेंधमारी रोक पाना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने अपनी पार्टी के नाम के साथ कांशीराम का नाम जोड़कर बसपा के काडर वोटबैंक में सेंध लगानी शुरू कर दी है। नगीना में भाजपा और सपा प्रत्याशी को पटकनी देने से साफ है कि उन्हें मुस्लिम और अन्य हिंदू जातियों का भी समर्थन मिला है।
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एनडीए की बैठक में तेदेपा को तीन, जदयू को दो और लोजपा, एनसीपी, शिवसेना, जनकल्याण, जदएस, रालोद को एक-एक मंत्री पद देने पर सहमति बनी है।
भाजपा के लिहाज से छह प्रांत में बंटे यूपी के हर क्षेत्र में 4 से लेकर 8 सीटों तक का उसे नुकसान उठाना पड़ा है।
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