आपकी होम लोन पात्रता की जांच करें


मुख्य बिंदु

   

  • - आपकी होम लोन पात्रता की जांच करें
  • - जानें कि आप किस-किस प्रकार के होम लोन ले सकते हैं
  • - अपने होम लोन का प्री-अप्रूवल पाएं
  • - इन्हें आंकें –
    • उपलब्ध लोन राशि
    • लोन की लागत
    • देय EMI
    • लोन की अवधि
  • - KYC, इनकम और असल प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट जिन्हें लोन राशि पाने के लिए जमा करना होगा
  • - पक्का करें कि लेंडर के पास प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट सुरक्षित ढंग से रखे जाएं और आसानी से वापस पाए जा सकते हों
  • - एक लोन कवर टर्म एश्योरेंस प्लान खरीद लें
  • - अपनी EMI का भुगतान नियमित रूप से करें

   

अपने घर का मालिक बनना आपके परिवार के कुछ सबसे बड़े फाइनेंशियल फैसलों में से एक है. पहली बार घर खरीदने वालों में से अधिकतर लोगों के लिए होम लोन ही वह एकमात्र जरिया है जिससे वे अपने घर का मालिक बनने के अपने सपने को साकार कर सकते हैं.

अगर आप होम लोन लेने की सोच रहे हैं, तो यह जरूरी है कि आप उसके बारे में सब कुछ समझ लें; आखिरकार, यह एक ऐसी जिम्मेदारी है जो कई सालों तक नहीं उतरेगी, तब तक नहीं जब तक कि आप लोन की सारी राशि चुका नहीं देते. होम लोन के लिए अप्लाई करने से पहले आपको ये 10 बातें जान लेनी चाहिए:

पात्रता की शर्तें

सबसे पहला कदम जो आपको उठाना होता है वह है यह पक्का करना कि आपहाउसिंग लोन के योग्य हों. शुरुआत में, लेंडर आपकी इनकम और रीपेमेंट क्षमता के आधार पर आपकी होम लोन पात्रता आंकेंगे. अन्य जरूरी चीजों में उम्र, योग्यता, फाइनेंशियल स्थिति, आश्रितों की संख्या, जीवनसाथी की इनकम और रोजगार का स्थायित्व शामिल हैं.

 

होम लोन के प्रकार

निम्नलिखित प्रकार केहोम लोन उपलब्ध हैं:

एडजस्टेबल/फ्लोटिंग रेट लोन:

इस प्रकार के लोन में ब्याज की दर लेंडर की बेंचमार्क दर से जुड़ी होती है. अगर बेंचमार्क दर में कोई बदलाव होता है तो ब्याज दर भी उसी अनुपात में बदल जाती है.

फिक्स्ड रेट लोन:

फिक्स्ड रेट लोन में, ब्याज दर लोन लेते समय निश्चित कर दी जाती है. यही ब्याज दर लोन की संपूर्ण अवधि के दौरान लागू रहती है.

कॉम्बिनेशन लोन:

इस प्रकार के लोन में लोन का एक हिस्सा फिक्स्ड ब्याज दर पर और बाकी का हिस्सा एडजस्टेबल या फ्लोटिंग ब्याज दर पर मिलता है.

 

पहले घर या पहले लोन

बेहतर यह है कि अपना घर चुनने से पहले अपना होम लोन प्री-अप्रूव करवा लें. प्री-अप्रूवल से आपको अपना बजट सही-सही तय करने में और उसी के दायरे में अपने घर की तलाश सीमित रखने में मदद मिलती है. प्री-अप्रूवल से बेहतर मोलभाव करने और सौदा जल्दी पक्का करने में भी मदद मिलती है. आप अपनी पसंदीदा जगह में अच्छी प्रॉपर्टी की उपलब्धता के बारे में अपने लेंडर से भी पूछ सकते हैं. असल में, कुछ प्रोजेक्ट ऐसे हो सकते हैं जो आपके लेंडर ने ही अप्रूव किए हों, इससे न केवल लेंडर द्वारा मांगे गए प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट में ढिलाई मिलती है, बल्कि आपको प्रोजेक्ट की क्वालिटी का भरोसा भी मिलता है.

 

लोन की राशि

नियामक संस्था द्वारा परिभाषित के अनुसार, अधिकांश लेंडर आपकी लोन वैल्यू के आधार पर, प्रॉपर्टी की लागत का 75 से 90 प्रतिशत तक हाउसिंग लोन प्रदान करते हैं. इसलिए, अगर लेंडर ने प्रॉपर्टी की वैल्यू ₹50 लाख लगाई है, तो आप ₹40 लाख (₹ 75 लाख तक की लोन राशि के लिए प्रॉपर्टी की लागत का 80%) तक का लोन ले सकते हैं, बशर्ते आप होम लोन के लिए पात्र हों. अगर आप कोई को-एप्लीकेंट को शामिल करते हैं, तो लेंडर उसकी इनकम को ध्यान में रखते हुए लोन की राशि को बढ़ा सकता है. आपकी संतान, माता-पिता या जीवनसाथी आपके को-एप्लीकेंट हो सकते हैं. प्रॉपर्टी खरीदने के लिए बाकी का भुगतान आपको करना होता है. उदाहरण के लिए, अगर प्रॉपर्टी की वैल्यू ₹ 50 लाख है और आपको ₹ 35 लाख का होम लोन स्वीकृत हुआ है, तो बाकी का ₹ 15 लाख का योगदान आपको अपनी तरफ से करना होगा. आप होम लोन के लिए पात्रता को जानने के लिए हाउसिंग लोन पात्रता कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं.

 

आपके होम लोन की लागत

अपने हाउसिंग लोन की उपयुक्तता आंकते समय आपको उसकी लागत को भी ध्यान में रखना चाहिए. लागत में ब्याज के भुगतान, प्रोसेसिंग फीस, एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज, प्रीपेमेंट पेनल्टी, आदि शामिल होंगे. आदर्श रूप से, एडजस्टेबल/फ्लोटिंग रेट लोन के मामले में आपके होम लोन के प्रीपेमेंट चार्ज शून्य होने चाहिए. आपके होम लोन में एक मामूली फीस चुकाकर उसकी ब्याज दर घटाने का विकल्प भी होना चाहिए. होम लोन पर विचार करते समय, पक्का कर लें कि उसमें कोई छिपे हुए चार्ज न हों. नियामक के अनुसार, लेंडर के लिए अपनी वेबसाइट पर बिना कुछ छिपाए फीस और चार्ज से संबंधित जानकारी प्रकट करना जरूरी है.

 

EMI/प्री-EMI

EMI का पूरा नाम है ईक्वेटेड मंथली इंस्टालमेंट यानि समान मासिक किस्त. आपको यह राशि हर महीने लेंडर को चुकानी होती है. इसमें मूलधन राशि का रीपेमेंट और लोन की बकाया राशि पर ब्याज का भुगतान शामिल होता है.

निर्माणाधीन प्रॉपर्टी के मामले में प्री-EMI लागू की जाती है. इस मामले में, आपको डेवलपर को जितनी राशि की किस्त चुकानी होती है उसके आधार पर आपके लोन की राशि हिस्सों में मिलती जाती है. आमतौर पर आपको मिली लोन की राशि पर केवल ब्याज (जिसे प्री-EMI ब्याज कहते हैं) का भुगतान शुरू करना होता है. अगर आप मूलधन का रीपेमेंट तुरंत शुरू करना चाहते हैं, तो आप लोन को हिस्सों में बांट सकते हैं और आप मिलती जा रहीं राशियों के योग पर EMI चुकाना शुरू कर सकते हैं.

 

अवधि

होम लोन अधिकतम 30 सालों के लिए स्वीकृत किए जा सकते हैं, जो कि ग्राहक की पात्रता के अधीन है. अवधि अधिक होने से EMI घटाने में मदद मिलती है. मिसाल के तौर पर, अगर ₹10 लाख का होम लोन 10.40 प्रतिशत की ब्याज पर 20 साल के लिए लिया जाए तो EMI ₹9,917 बैठती है. अब अगर हम अवधि बढ़ाकर 30 साल कर दें तो EMI घटकर ₹9,073 रह जाती है.*

 

डॉक्यूमेंटेशन

होम लोन के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट को इन श्रेणियों में रखा जा सकता है:

KYC से संबंधित डॉक्यूमेंट:

इनमें आपकी पहचान और पते के प्रमाण आते हैं. इसके तहत आप मान्य पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड आदि पेश कर सकते हैं.

क्रेडिट/इनकम डॉक्यूमेंट:

इन डॉक्यूमेंट से लेंडर को आपकी लोन पात्रता आंकने में मदद मिलती है. अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो आप अपनी पिछले 3 महीनों की सेलरी स्लिप जमा कर सकते हैं; अगर आप स्व-व्यवसायी हैं, तो आप पिछले 3 सालों की इनकम की गणना के साथ इनकम टैक्स रिटर्न जमा कर सकते हैं.

प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट:

इन डॉक्यूमेंट में बिक्री करार (एग्रीमेंट टू सेल), स्वामित्व विलेख (टाइटल डीड) आदि आते हैं. लेंडर इन डॉक्यूमेंट के आधार पर प्रॉपर्टी की उचित पड़ताल करता है.

जहां होम लोन अप्रूवल पाने के लिए आपको होम लोन एप्लीकेशन के साथ अपने KYC डॉक्यूमेंट और क्रेडिट/इनकम डॉक्यूमेंट जमा करने होते हैं, वहीं आपको अपना होम लोन डिस्बर्समेंट पाने के लिए अपने मूल प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट जमा करने होते हैं.

अपने होम लोन के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट की पूरी सूची देखने के लिए, www.hdfc.com देखें

आपके प्रॉपर्टी पेपर्स महत्वपूर्ण होते हैं. चूंकि आपके असल प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट, जैसे टाइटल डीड, एग्रीमेंट टू सेल, आपके योगदान की रसीदें आदि, फाइनेंस की जा रही प्रॉपर्टी में प्रतिभूति हित (सिक्योरिटी इंटरेस्ट) के तौर पर लेंडर के पास बंधक रखे जाते हैं, अतः यह जरूरी है कि लेंडर आपके डॉक्यूमेंट सुरक्षित ढंग से भंडारित रखे. डॉक्यूमेंट की आसानी से वापस प्राप्ति एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू है. जांचें कि क्या लेंडर ने अपनी भंडारण इकाइयों को कई अलग-अलग स्थानों पर निर्मित किया है, ताकि जब कस्टमर को जरूरत हो तब डॉक्यूमेंट आसानी से वापस पाए जा सकें.

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