सुकरात के अनमोल विचार
सुकरात के अनमोल विचार
कर्म ही कामधेनु है। महात्मा गाँधी
कर्म ही कामधेनु है।
महात्मा गाँधी
देह जल से पवित्र होती है, मन सत्य से, आत्मा धर्म से औरबुद्धि मन से पवित्र होती है। पस्पर विरोधी बातों के बीच एकता कराने अधिक, कटिल काम कोई और नहीं है।
ओवेन डिक्सन
अन्याय को मिटाओ, लेकिन अपने आपको मिटाकर नहीं।
प्रेमचंद
कर्म ही मानव जीवन को पवित्र, अहिंसक और पूर्ण बनाता है।
-विनोबा भावे
चूंकि अपने कर्मों के फल से बचना असंभव है, इसलिए हम सत्कर्म करें।
-भगवान बुद्ध
संपूर्ण सद्कर्मो का मूल सत्य है।
जवाहर लाल नेहरु
शुभ विचार-Shubh Vichar in Hindi
जीवन में विजय प्राप्त करना जमी नहीं है, बल्कि ठीक से लड़ना आवश्यक है।
पियरे डी काऊ बरतिन
जो अपने परिश्रम से जीविका चलाता है तथा अन्यों का पोषण करता है, वही पथ-पदर्शन कर सकता है।
-गुरु नानक देव
अच्छा कर्म बुरे को काटता नहीं। दोनों का फल भोगना ही पड़ेगा।-रजनीश
कर्महीन मनुष्य शिक्षा के दान का अधिकारी नहीं हो सकता।
-विनोबा भावे
केवल वही व्यक्ति बेकार नहीं है जो बैठा रहता है, बल्कि वह भी बेकार माना जाएगा जिसकी योग्यता का पूर्ण लाभ नहीं लिया जाता।
-सुकरात
ईश्वर उसी के निर्वाह की चिंता करता है जो अपनी शक्ति-भर पूरा श्रम करता है और श्रम करने में प्रतिष्ठा समझता है।
-कृष्णदत्त
तुम निरंतर कर्म करते रहो, किंतु कर्म में आसक्ति का त्याग कर दो-यही ‘कर्म-योग’ है।
-स्वामी विवेकानंद
संसार में ऐसा कोई पहाड़, आकाश, समुद्र, स्वर्ग आदि नहीं हैं जहां पर किए हुए कर्मों का फल न मिलता हो।
-योगवासिष्ठ
कर्मयोग के अनुसार बिना फल उत्पन्न किए कोई भी कर्म नष्ट नहीं हो सकता। प्रकृति की कोई भी शक्ति उसे फल उत्पन्न करने से नहीं रोक सकती।
-स्वामी विवेकानंद
कर्म, ज्ञान और शक्ति इन तीनों का जिस जगह सेवन होता है, वही श्रेष्ठ पुरुषार्थ है।
-महर्षि अरविंद
शुभ विचार-Shubh Vichar in Hindi
परमात्मा सब प्राणियों को रोटी-पानी देता है, परंतु इनको उनके घरों में नहीं फेंकता है।
-अज्ञात
प्रकृति को अपने विकास में रुकना नहीं आता, इसलिए अकर्मण्यता पर वह अपना अभिशाप जताती है
गेटे
जिस व्यक्ति ने कल्पना के महल नहीं बनाए, उसे वास्तविक महल की उपलब्धि कभी नहीं हो सकती।
-निवेदिता
कुछ कर्म स्वभाव से ही करने योग्य नहीं होते, उसी प्रकार वे भी करने योग्य नहीं होते, जिनमें किया गया पुरुषार्थ निष्फल हो।
–महात्मा विदुर
अपने लक्ष्य को मत भूलो अन्यथा जो कुछ मिलेगा केवल उसमें संतोष करना पड़ेगा।
-बर्नार्ड शॉ
प्रयत्न देव है व भाग्य देवता है। इसलिए प्रयत्न देवकी उपासना काम ही श्रेयस्कर है।
–समर्थ रामदास
कर्म ही पुरुष है और पुरुष ही कर्म है। ये दोनों इस प्रकार अभिन्न है जैसे बर्फ और उसकी शीतलता।
योगवासिष्ठ
संसार के समस्त संबंध तथा पदार्थ क्षणिक हैं, केवल अपना कर्म ही शेष रहता है।
–धनंजय
कार्य को अच्छी तरह करने के लिए उसमें रस लेना चाहिए और कार्य में रस आए इसके लिए कर्म आपकी पसंद का होना चाहिए। जिन लोगों ने राष्ट्र, संस्कृति जैसे निर्माण के बड़े-बड़े कार्य किए हैं वे सभी तत्पर और जागृत कार्यकर्ता थे, जय-जयकार के फेर में न पड़कर, अच्छे फल के लिए कोशिश कीजिए।
-विट्ठलदास मोदी
काम ही भावनाओं का आग्रज होता है।
–डॉ. जॉर्ज डब्ल्यू क्रेन
शुभ विचार-Shubh Vichar in Hindi
इससे बड़ी कोई घातक भूल नहीं हो सकती कि हम किसी मंजिल को अंतिम लक्ष्य समझें या किसी पड़ाव पर अधिक देर तक ठहरे रहें।
–महर्षि अरविंद
अच्छाई से नजदीकी और बुराई से दूरी बनाकर कर्म करने में ही भलाई है।
–अज्ञात
कर्महीन मनुष्य शिक्षा का, दान का अधिकारी नहीं हो सकता।
-अज्ञात
देश कभी चोर-उच्चकों की करतूतों से बरबाद नहीं होता, बल्कि शरीफ लोगों की कायरता और निकम्मेपन से होता है।
-शिव खेड़ा
Shubh Vichar in Hindi
अपने अंदर निवास करो, बाहरी घटनाओं से विचलित न हो।
–अज्ञात
जो जान गया है कि उससे भूल हो गई और उसे ठीक नहीं करता वह एक और भूल कर रहा है।
-कन्फ्यूशियस
श्रम और पूंजी एक-दूसरे पर आश्रित हैं। पूंजी श्रम के बिना नहीं पनप सकती और श्रम का पूंजी के अभाव में कोई अस्तित्व नहीं।
-पोप लियो
शुभ विचार-Shubh Vichar in Hindi
जिनके पास अपनी शक्ति नहीं, उन्हें भगवान भी शक्ति नहीं देता। शक्तिआत्मा के अंदर से आती है, बाहर से नहीं।
–सुदर्शन
जब मनुष्य का युद्ध अपने-आपसे आरंभ होता है तब उसका कुछ मूल्य होता है।
-ब्राउनिंग
जब जीवन का पथ उबड़-खाबड़ हो तब अपने मस्तिष्क को सहज रखें। जैसे कि पहाड़ों से फूटकर पानी निकलता है और एक शांत जलधारा में मिल जाता है।
–अज्ञात
पुरुषार्थी बढ़ते हैं और सिद्धियां पाते हैं। अकर्मण्य पिछड़ते हैं और प्रगति से वंचित रह जाते हैं।
-अज्ञात
अग्नि सोने को परखती है और आपत्ति वीर पुरुषों को।
“अज्ञात
विपदाएं ऐसी परीक्षाएं हैं जो हमें मजबूत बनाने, मनोबल को परखने व जीवट को जांचने के लिए आती है।
–अज्ञात
ईश्वर की पूजा सत्कर्मों के पुष्पों से की जाती है।
-अज्ञात
शुभ विचार-Shubh Vichar in Hindi
आपत्तियों की अग्नि हमारी हड्डियों को फौलाद जैसी मजबूत बनाती है।
-अज्ञात
अच्छे से अच्छे के लिए प्रयास करें, बुरी से बुरी परिस्थितियों के लिए तैयार रहें।
-अज्ञात
उत्कृष्टता इसी में है कि सामान्य से अलग हटकर कार्य पूर्ण करें। हम न केवल योजना बनाएं और कार्य करें, वरन स्वप्न भी देखें और उन्हें आत्म-कल्याण के लिए गुण, कर्म और स्वभाव का परिष्कार आवश्यक है।
-अज्ञात
कुरीति के अधीन रहना कायरता है और उसका विरोध करना पुरुषार्थ।
-अज्ञात
काम उद्यम से सिद्ध होते हैं, मनोरथ से नहीं।
-अज्ञात
शुभ विचार-Shubh Vichar in Hindi
कार्य को उदारतापूर्वक करना ही उसका इनाम पाना है।
-अज्ञात
मार्ग उन्हीं का अवरुद्ध रहता है, जो अपने ऊपर भरोसा नहीं करते।
-अज्ञात
उत्तम कृत्य स्वयं फल है।
-अज्ञात
जो लोग कभी कोई काम नहीं करते हैं उन्हें कभी भी अवकाश नहीं मिलना चाहिए।
-सैमुअल
Shubh Vichar in Hindi
अनंत संभावनाओं के बावजूद पहाड़ के नीचे विश्राम करने की बजाय शिखर तक पहुंचे बगैर चैन से मत बैठो।
-मिलर
जब तक प्रकाश है आगे बढ़ते रहो, अन्यथा अंधकार हमें घेर लेगा।
–बाइबिल
शुभ विचार-Shubh Vichar in Hindi
सबसे अच्छा मनुष्य वह है जो अपनी प्रगति के लिए सबसे अधिक श्रम करता है।
-सुकरात
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राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप
सब्र एक ऐसी सवारी है, जो अपने सवार को कभी गिरने नही देती है, न किसी के कदमों में और न ही किसी की नजरों में।
केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कुछ राज्यों ने बड़े एलान किए हैं। उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश उत्तराखंड और हरियाणा की सरकारों ने अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में वरीयता देने की बात कही है।
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