कहते है मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। जी हाँ ये कर दिखाया है प्राथमिक


कहते है मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। जी हाँ ये कर दिखाया है प्राथमिक विद्यालय बसेला के प्रभारी प्रधानाध्यापक पवन भारती ने जिन्होंने दिन रात एक करके बिना अवकाश लिए अब हर संडे बन जायेगा फन-डे पहल जैसे कई नवाचारी खोजों से एक नया आयाम स्थापित किया है। यूँ तो कहानियो के द्वारा शिक्षण कार्य करना आनंदमयी होता है लेकिन आज एक ऐसी कहानी की चर्चा कर रहे है जो पूर्णतः सत्य व जीवंत है। ये कहानी है गाँव बसेला की एक दिव्यांग लड़की की जिसका नाम दुर्गा है। प्राथमिक विद्यालय बसेला के प्रभारी प्रधानाध्यापक श्री पवन भारती द्वारा राज्य बाल कहानी लेखन प्रतियोगिता 2022-23 में प्रतिभाग किया गया जिसमें उन्होंने कोई भी काल्पनिक कहानी न लेकर एक सत्य व जीवंत कहानी को चुना। ये कहानी उन्ही के विद्यालय में अध्ययन कर रही एक ऐसी छात्रा की है जो मानसिक, श्रव्य व वाक दिव्यांगता से ग्रसित है।कहानी का शीर्षक "दुर्गा- उम्मीद की एक किरण"है। इस कहानी में दुर्गा के गाँव के लोगो द्वारा उसके  साथ जो व्यवहार किया जाता था और कैसे उसकी दिव्यांगता के कारण उसे मुख्य धारा से नही जोड़ा गया साथ ही ऐसे पिछड़े हुए बच्चों को समाज मे किन किन धारणाओं से गुजरना पड़ता है आदि पर आधारित है। पवन भारती द्वारा बताया गया कि कैसे उन्हें दुर्गा के बारे में पता चला और फिर उसे विद्यालय में प्रवेश देकर कैसे मुख्यधारा से जोड़ा गया। दुर्गा जो बिल्कुल भी बोलती ही नही थी और सुनाई भी बिल्कुल न के बराबर देता था उसको पवन भारती द्वारा स्पीच थेरैपी कराई गई। विद्यालय में अन्य बच्चों के साथ ही उसको समावेशी शिक्षा का अवसर देकर उपचारात्मक शिक्षा दी गयी। सभी बच्चो के साथ उसको खेलने के अवसर देना, डांस करने का अवसर देना, मंच पर बोलने का अवसर देना और शिक्षक खुद अपना टिफिन दुर्गा को देते थे। अन्य बच्चो की तरह दुर्गा को बेहद प्यार व दुलार देना और उसको सीने से लगाकर अपना स्नेह देना साथ ही कभी दुर्गा के लिए खुद बच्चा बन कर एक बच्चे व दोस्त की तरह समझाना व एक माँ की तरह उसके बालो की  चोटी और ड्रेस सही करना आदि गतिविधियां लगातार 2 वर्षों से चलती रही जिसके कारण आज दुर्गा में अप्रत्याशित परिवर्तन हुए है।इन परिवर्तनों में और इस कार्य मे प्रधान श्रीमती जयश्री मुनीश भारती द्वारा सहयोग दिया गया है जिनके द्वारा बच्चो की मैपिंग कराई गई है व स्पीच थेरैपी कैसे करनी है इत्यादि को बताया गया है। अब दुर्गा खुद पढ़ती है और खुद ही बोलकर सुनाती है जिससे अन्य बालको के लिए भी दुर्गा एक उदाहरण पेश करती है।इस सत्य घटना को  पवन भारती द्वारा एक कहानी के रूप में वर्णित किया गया है। ये कहानी जनपद स्तर पर सर्वाधिक अंक 40  प्राप्त करके राज्य के लिए चयनित की गई है।कहानी के चयनित होने पर दुर्गा को एक नई पहचान मिली है और दुर्गा व इनके  परिवार के सदस्य बेहद प्रसन्न है।इस इस कहानी में समाज के लिए एक गहरा संदेश दिया गया है और समाज के लोगो मे ये अलख जगाई है कि हर एक बच्चा या इंसान प्रतिभाशाली है हमें उसके गुणों और उसमें परिवर्तन लाने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए और किसी के शारीरिक रंग रूप से भेदभाव नही करना चाहिए। अगर इंसान सच्ची लगन और अथक प्रयास करे तो कोई भी कार्य असंभव नही है। दशरथ मांझी द्वारा जब एक पहाड़ काटकर रास्ता बनाया गया जो आज न जाने कितने लोगों को प्रेरणा देते है औऱ जीवन मे नई ऊर्जा व जोश भरते है।पवन भारती की इस कहानी के चयनित होने पर डायट प्राचार्य श्री कमलेश कुमार ओझा , जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री आनंद प्रकाश शर्मा व डायट प्रवक्ता श्री अमित शर्मा द्वारा प्रसन्नता व्यक्त की शुभकामनाएं दी।दातागंज विकास क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी श्री लक्ष्मी नरायण गंगवार द्वारा कहा गया कि ऐसे बच्चो को मुख्यधारा से जोड़ना और पढ़ना लिखना व बोलना सिखाना बहुत ही नेक व पूण्य का कार्य किया गया। इस कामयाबी पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं भी दी है।महामंत्री श्री माधव सिंह व ए आर पी श्री फरहत हुसैन, राहुल चौधरी, मनवीर सिंह,चंद्रवीर सिंह, सुखदेश ने दातागंज की इस कामयावी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी है।


मुशाहिद रजा बदायु

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