अकबरपुर तहसीलदार ने सुनाया कड़ा फैसला, साक्ष्य न देने पर एक पक्षीय कार्रवाई, माफियाओं और अवैध कब्जा धारकों में मचा हड़कंप


अकबरपुर तहसीलदार ने सुनाया कड़ा फैसला, साक्ष्य न देने पर एक पक्षीय कार्रवाई, माफियाओं और अवैध कब्जा धारकों में मचा हड़कंप

​ सरवनखेड़ा (कानपुर देहात)09 जुलाई। उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों और जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान के तहत कानपुर देहात प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है। अकबरपुर तहसील के ग्राम गजनेर में पिछले 25 से अधिक वर्षों से सरकारी तालाब की भूमि पर अवैध रूप से दुकान व मकान बनाकर कब्जा करने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ तहसीलदार न्यायालय ने बेदखली और हर्जाने का कड़ा आदेश पारित किया है। अदालती फैसले के बाद क्षेत्र के भू-माफियाओं और अवैध कब्जा धारकों में हड़कंप मच गया है।
        ​मामला सरवनखेड़ा विकास खण्ड क्षेत्र के ग्राम गजनेर की गाटा संख्या 900 से जुड़ा है, जो सरकारी राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है। इस कीमती जमीन के करीब 0.008 हेक्टेयर हिस्से पर स्थानीय निवासी जयनारायण सिंह पुत्र जगन्नाथ सिंह ने अवैध रूप से पक्का निर्माण (दुकाने) बनवा कर रखा है। साल 2017 में क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा प्रस्तुत की गई आर०सी० प्रपत्र 19 की रिपोर्ट के बाद इस मामले की कानूनी सुनवाई उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 67 के तहत तहसीलदार न्यायालय में शुरू हुई थी।न्यायालय द्वारा विपक्ष को अपना पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कई अवसर दिए गए। शुरुआत में आरोपी पक्ष द्वारा आपत्ति दाखिल कर दावा किया गया था कि उक्त निर्माण वर्ष 1978 में आवंटित आवास के आधार पर किया गया था और लेखपाल की रिपोर्ट गलत है। हालांकि, इसके बाद प्रतिवादी लगातार अदालती सुनवाइयों से अनुपस्थित रहा और अपनी आपत्ति के समर्थन में कोई पुख्ता साक्ष्य या दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
              वहीं ​ग्राम सभा के नामिका अधिवक्ता ने बहस के दौरान कोर्ट के समक्ष अकाट्य तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिससे स्पष्ट हुआ कि विवादित भूमि वास्तव में तालाब की श्रेणी में आती है और उस पर किया गया कब्जा पूरी तरह गैरकानूनी है। प्रतिवादी के लगातार अनुपस्थित रहने के कारण तहसीलदार न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एकपक्षीय अंतिम आदेश पारित किया।​अंतिम आदेश के तहत, आरोपी जयनारायण सिंह को सरकारी तालाब की भूमि से तत्काल बेदखल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, लगभग 29 वर्षों तक सरकारी संपत्ति का अवैध उपयोग करने और उसे क्षति पहुँचाने के एवज में सर्किल रेट के आधार पर 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से कुल ₹74,240.00 का जुर्माना (क्षतिपूर्ति) लगाया गया है। इसके अलावा ₹750.00 का मुकदमा निष्पादन व्यय भी वसूल किया जाएगा। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही पुलिस बल की मौजूदगी में बेदखली और हर्जाना वसूली की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जाएगा।


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