अब तक न्याय जनपद पीलीभीत बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अन्तर्गत महाविद्यालय में कार्यक्रम किया आयोजित
अब तक न्याय जनपद पीलीभीत बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अन्तर्गत महाविद्यालय में कार्यक्रम किया आयोजित
पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान के लिए आगे आया अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद शोषण, उत्पीड़न और झूठे मुकदमों के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष का संकल्प विशेष संवाददाता लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ माना जाता है। समाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित की रक्षा में पत्रकारों की भूमिका अत्
विशेष संवाददाता
लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ माना जाता है। समाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित की रक्षा में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। पत्रकार ही वह माध्यम होते हैं जो शासन-प्रशासन की नीतियों और समाज में घटित घटनाओं को जनता तक पहुंचाते हैं। सच्चाई को सामने लाने का साहस और समाज के कमजोर वर्गों की आवाज़ बनने का दायित्व पत्रकारों के कंधों पर होता है।
लेकिन वर्तमान समय में पत्रकारों के सामने अनेक चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। कई बार सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकारों को दबाने की कोशिश की जाती है। उन पर झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं, उन्हें धमकियां दी जाती हैं और कई मामलों में शारीरिक उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ता है।
ऐसे कठिन हालात में पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत संगठन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद का गठन किया गया है। यह संगठन पत्रकारों, छायाकारों और संपादकों का एक निर्भीक, निष्पक्ष और संघर्षशील मंच है, जो पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा के लिए निरंतर संघर्ष कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। संगठन का मानना है कि यदि पत्रकार भयमुक्त होकर काम नहीं करेंगे तो समाज में सच्चाई सामने नहीं आ सकेगी।
इसी कारण संगठन ने यह संकल्प लिया है कि पत्रकारों के शोषण और उत्पीड़न के मामलों में वह स्वतः संज्ञान लेकर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करेगा और पीड़ित पत्रकार को हर संभव सहायता प्रदान करेगा।
अक्सर देखा जाता है कि जब कोई पत्रकार भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को उजागर करता है तो उसे दबाने के लिए उसके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद ने ऐसे मामलों में पत्रकारों को कानूनी सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है। संगठन के साथ जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता झूठे मुकदमों में फँसे पत्रकारों की निशुल्क पैरवी करेंगे और न्याय दिलाने के लिए अदालत में मजबूती से उनका पक्ष रखेंगे।
यह पहल पत्रकारों के आत्मविश्वास को मजबूत करने और उन्हें निर्भीक होकर पत्रकारिता करने के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद केवल कानूनी सहायता तक सीमित नहीं है। संगठन का मानना है कि पत्रकारों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ समाज को भी जागरूक करना आवश्यक है।
इसी उद्देश्य से संगठन लोकतांत्रिक तरीके से धरना, प्रदर्शन और जनसंघर्ष के माध्यम से पत्रकारों की आवाज़ को बुलंद करता है।
यदि किसी पत्रकार के साथ अन्याय होता है तो संगठन उस मुद्दे को प्रशासन और सरकार के सामने मजबूती से उठाता है और आवश्यकता पड़ने पर सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करने के लिए तैयार रहता है।
पत्रकारिता कई बार जोखिम भरा कार्य भी बन जाता है। कई पत्रकार सच्चाई को सामने लाने के प्रयास में अपनी जान तक गंवा देते हैं।
ऐसे कठिन समय में उनके परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता होती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद ने घोषणा की है कि यदि न्यूज़ कवरेज के दौरान किसी पत्रकार की मृत्यु हो जाती है तो संगठन की ओर से उनके परिजनों को ₹1,00,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
यह सहयोग पत्रकारों के परिवारों के प्रति संगठन की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाता है।
समाचार कवरेज के दौरान कई बार पत्रकार दुर्घटनाओं या हमलों का शिकार हो जाते हैं और उन्हें गंभीर चोटें लग जाती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में इलाज का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।
इस समस्या को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद ने घायल पत्रकारों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है।
पत्रकारों के परिवारों की सुरक्षा और उनके बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संगठन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।
यदि किसी पत्रकार के परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है तो संगठन उनके बच्चों के लिए एक वर्ष तक शिक्षा और भोजन की व्यवस्था करने का प्रयास करेगा।
यह पहल पत्रकारों के परिवारों को सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद का मानना है कि पत्रकारों की समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब पत्रकार एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाएं।
यदि पत्रकार अलग-अलग रहेंगे तो उनकी आवाज़ कमजोर होगी, लेकिन यदि वे संगठित होकर संघर्ष करेंगे तो उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।
इसी उद्देश्य से संगठन देशभर के पत्रकारों, छायाकारों और संपादकों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद ने देशभर के पत्रकारों से संगठन से जुड़ने की अपील की है।
संगठन की वार्षिक सदस्यता शुल्क मात्र ₹500 निर्धारित की गई है ताकि अधिक से अधिक पत्रकार इस संगठन से जुड़ सकें और अपने अधिकारों की इस लड़ाई को मजबूत बना सकें।
सदस्य बनने के लिए इच्छुक पत्रकारों को अपना पूरा विवरण और फोटो संगठन को भेजना होगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ लंबे समय से पत्रकारों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ते रहे हैं।
उनका कहना है कि पत्रकार समाज की आंख और कान होते हैं। यदि पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित नहीं की जाएगी तो लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य पत्रकारों को मजबूत और सुरक्षित बनाना है, ताकि वे निर्भीक होकर सच्चाई को सामने ला सकें।
अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद ने देशभर के पत्रकारों से अपील की है कि वे संगठन से जुड़कर पत्रकारों के सम्मान और अधिकारों की इस लड़ाई को मजबूत बनाएं।
मोबाइल: 9454325236, 7905026393
राजेश कुमार सिद्धार्थ
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद
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अब तक न्याय जनपद पीलीभीत बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अन्तर्गत महाविद्यालय में कार्यक्रम किया आयोजित
पत्रकारों की आवाज़ को ताकत देने के लिए आगे आया ‘अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद’ उपशीर्षक: पत्रकारों के शोषण, उत्पीड़न और झूठे मुकदमों के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष का संकल्प, कानूनी सहायता से लेकर आर्थिक सहयोग तक कई महत्वपूर्ण योजनाएँ विशेष संवाददाता लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ क
पत्रकारों के शोषण, उत्पीड़न और झूठे मुकदमों के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष का संकल्प, कानूनी सहायता से लेकर आर्थिक सहयोग तक कई महत्वपूर्ण योजनाएँ
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