राष्ट्रीय किसान यूनियन (सिद्धार्थ) किसान भविष्य निधि, कल्याण कोष एवं दैविक आपदा सहायता : सहायता राशि की न्यूनतम एवं अधिकतम सीमा 1 किसान भविष्य निधि / कल्याण कोष से सहायता प्रदान करते समय सहायता राशि की न्यूनतम एवं अधिकतम सीमा निम्नानुसार निर्धारित की जाएगी— (क) जिला स्तर पर न्यूनतम स


राष्ट्रीय किसान यूनियन (सिद्धार्थ)

किसान भविष्य निधि, कल्याण कोष एवं दैविक आपदा सहायता

: सहायता राशि की न्यूनतम एवं अधिकतम सीमा

1 किसान भविष्य निधि / कल्याण कोष से सहायता प्रदान करते समय सहायता राशि की न्यूनतम एवं अधिकतम सीमा निम्नानुसार निर्धारित की जाएगी—

(क) जिला स्तर पर

न्यूनतम सहायता राशि : ₹2,500/-

अधिकतम सहायता राशि : ₹10,000/-

स्वीकृति प्राधिकारी : जिला अध्यक्ष / जिला कार्यकारिणी

(ख) प्रदेश स्तर पर

न्यूनतम सहायता राशि : ₹10,001/-

अधिकतम सहायता राशि : ₹50,000/-

स्वीकृति प्राधिकारी : प्रदेश अध्यक्ष / प्रदेश कार्यकारिणी

(ग) राष्ट्रीय स्तर पर

न्यूनतम सहायता राशि : ₹50,001/-

अधिकतम सहायता राशि : ₹2,00,000/- (दो लाख रुपये तक)

स्वीकृति प्राधिकारी : राष्ट्रीय अध्यक्ष / राष्ट्रीय कार्यकारिणी

: विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त सहायता

.1 अत्यंत गंभीर दैविक आपदा, सामूहिक कृषि नुकसान, अथवा असाधारण मानवीय संकट की स्थिति में राष्ट्रीय कार्यकारिणी—

निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक सहायता राशि, अथवा

चरणबद्ध (किस्तों में) सहायता

स्वीकृत करने हेतु सक्षम होगी।

2 इस प्रकार की विशेष सहायता का पूर्ण विवरण, कारण सहित, संगठन की विधिवत बैठक की कार्यवाही एवं अभिलेखों में दर्ज किया जाना अनिवार्य होगा।

: सहायता राशि के भुगतान का स्वरूप

.1 सहायता राशि का भुगतान निम्नलिखित पारदर्शी माध्यमों से किया जाएगा—

बैंक हस्तांतरण

चेक

अथवा संगठन द्वारा अधिकृत अन्य डिजिटल/लेखा-परीक्षित माध्यम

.2 नकद भुगतान केवल अत्यंत आपात परिस्थितियों में, सीमित राशि तक, तथा विधिवत रसीद एवं अभिलेख के साथ ही किया जा सकेगा।

: सहायता राशि की समीक्षा एवं संशोधन अधिकार

.1 संगठन की आर्थिक स्थिति, कोष की उपलब्धता, तथा आपदाओं की प्रकृति को दृष्टिगत रखते हुए राष्ट्रीय कार्यकारिणी को समय-समय पर सहायता राशि की सीमा में संशोधन करने का अधिकार होगा।

संवैधानिक टिप्पणी

सहायता राशि का निर्धारण संगठन की संवेदनशीलता, पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन एवं सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के सिद्धांतों पर आधारित होगा। ====राष्ट्रीय किसान यूनियन (सिद्धार्थ)
विधिक / न्याय प्रकोष्ठ
पदों की सूची एवं संरचना
राष्ट्रीय स्तर – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

राष्ट्रीय मुख्य विधिक सलाहकार

राष्ट्रीय अध्यक्ष – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

राष्ट्रीय महासचिव – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

राष्ट्रीय सचिव – विधिक सहायता

राष्ट्रीय सचिव – किसान अधिकार एवं कानून जागरूकता

राष्ट्रीय प्रवक्ता – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

राष्ट्रीय विधिक अनुसंधान प्रमुख

राष्ट्रीय जनहित याचिका (PIL) समन्वयक

राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं संवैधानिक समन्वयक

राष्ट्रीय न्यायिक समन्वयक (न्यायालय एवं अधिवक्ता संपर्क)

राष्ट्रीय विधिक प्रशिक्षण एवं कार्यशाला प्रभारी

राष्ट्रीय आरटीआई एवं सूचना अधिकार प्रभारी

राष्ट्रीय अनुशासनात्मक एवं विधिक अनुश्रवण अधिकारी

राष्ट्रीय विधिक प्रकोष्ठ सदस्य (आवश्यकतानुसार)राष्ट्रीय किसान यूनियन (सिद्धार्थ)
विधिक / न्याय प्रकोष्ठ
पदों की सूची एवं संरचना
प्रदेश स्तर – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

प्रदेश मुख्य विधिक सलाहकार

प्रदेश अध्यक्ष – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

प्रदेश उपाध्यक्ष – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

प्रदेश महासचिव – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

प्रदेश सचिव – विधिक सहायता

प्रदेश सचिव – किसान अधिकार एवं कानून जागरूकता

प्रदेश प्रवक्ता – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

प्रदेश विधिक अनुसंधान प्रभारी

प्रदेश जनहित याचिका (PIL) समन्वयक

प्रदेश मानवाधिकार एवं संवैधानिक समन्वयक

प्रदेश न्यायिक समन्वयक (उच्च/जिला न्यायालय संपर्क)

प्रदेश विधिक प्रशिक्षण एवं कार्यशाला प्रभारी

प्रदेश आरटीआई एवं सूचना अधिकार प्रभारी

प्रदेश अनुशासनात्मक एवं विधिक अनुश्रवण अधिकारी

प्रदेश विधिक प्रकोष्ठ सदस्य (आवश्यकतानुसार)

प्रदेश स्तर की भूमिका (संक्षेप)

प्रदेश विधिक / न्याय प्रकोष्ठ राज्य स्तर पर किसानों से जुड़े कानूनी मामलों, न्यायालयीन समन्वय, जनहित याचिकाओं, विधिक प्रशिक्षण तथा जिला इकाइयों के मार्गदर्शन का कार्य करेगा।

जिला स्तर – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

जिला विधिक सलाहकार

जिला अध्यक्ष – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

जिला उपाध्यक्ष – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

जिला महासचिव – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

जिला सचिव – विधिक सहायता

जिला सचिव – किसान अधिकार एवं कानून जागरूकता

जिला प्रवक्ता – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ

जिला न्यायालय समन्वयक

जिला मानवाधिकार एवं संवैधानिक प्रभारी

जिला आरटीआई एवं अभिलेख प्रभारी

जिला विधिक प्रशिक्षण / जागरूकता प्रभारी

जिला विधिक प्रकोष्ठ सदस्य (आवश्यकतानुसार)

जिला स्तर की भूमिका (संक्षेप)

जिला विधिक / न्याय प्रकोष्ठ का दायित्व किसानों को प्राथमिक विधिक सहायता उपलब्ध कराना, स्थानीय प्रशासन एवं न्यायालयों में समन्वय स्थापित करना, तथा विधिक जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन करना होगाराष्ट्रीय किसान यूनियन (सिद्धार्थ)
विधिक / न्याय प्रकोष्ठ
कार्य, अधिकार एवं उत्तरदायित्व
धारा 56 : राष्ट्रीय स्तर – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ के कार्य, अधिकार एवं उत्तरदायित्व
1 कार्य (Functions)

(क) किसानों से संबंधित राष्ट्रीय महत्व के विधिक, संवैधानिक एवं मानवाधिकार मामलों का मार्गदर्शन एवं संचालन।
(ख) उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों तथा राष्ट्रीय आयोगों में संगठन की ओर से विधिक रणनीति तैयार करना।
(ग) जनहित याचिकाओं (PIL) की पहचान, स्वीकृति, समन्वय एवं पर्यवेक्षण।
(घ) किसान कानूनों, नीतियों एवं संवैधानिक प्रावधानों पर विधिक अनुसंधान एवं विश्लेषण।
(ङ) संगठन के राष्ट्रीय निर्णयों, आंदोलनों एवं घोषणाओं को संवैधानिक रूप से वैध बनाने हेतु विधिक परामर्श देना।
(च) प्रदेश एवं जिला विधिक प्रकोष्ठों का मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं निगरानी।

2 अधिकार (Powers)

(क) संगठन की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर विधिक अभिमत (Legal Opinion) जारी करने का अधिकार।
(ख) विशेष मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं, विधि विशेषज्ञों एवं संस्थानों से सहयोग लेने का अधिकार।
(ग) अत्यंत गंभीर मामलों में प्रदेश/जिला इकाइयों को निर्देश जारी करने का अधिकार।
(घ) राष्ट्रीय कार्यकारिणी की स्वीकृति से विशेष विधिक समितियों का गठन करने का अधिकार।

.3 उत्तरदायित्व (Responsibilities)

(क) संगठन की प्रत्येक विधिक कार्रवाई को संविधान एवं कानून के दायरे में सुनिश्चित करना।
(ख) सभी महत्वपूर्ण मामलों का विधिवत अभिलेख एवं रिपोर्ट राष्ट्रीय कार्यकारिणी को प्रस्तुत करना।
(ग) विधिक प्रकोष्ठ की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं अनुशासन बनाए रखना।

: प्रदेश स्तर – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ के कार्य, अधिकार एवं उत्तरदायित्व
.1 कार्य (Functions)

(क) राज्य स्तर पर किसानों से जुड़े विधिक मामलों का समन्वय एवं निगरानी।
(ख) उच्च न्यायालय, राज्य आयोगों एवं न्यायिक मंचों में मामलों की तैयारी एवं संचालन।
(ग) जिला इकाइयों से प्राप्त मामलों का परीक्षण कर आवश्यक विधिक सहायता उपलब्ध कराना।
(घ) राज्य सरकार की नीतियों, आदेशों एवं कानूनों का विधिक विश्लेषण कर संगठन को अवगत कराना।
(ङ) विधिक जागरूकता शिविर, प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशालाओं का आयोजन।

.2 अधिकार (Powers)

(क) प्रदेश स्तर पर विधिक नोटिस, अभ्यावेदन एवं याचिकाओं को अनुमोदित करने का अधिकार।
(ख) आवश्यकतानुसार जिला विधिक प्रकोष्ठों को दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार।
(ग) राज्य स्तर पर अधिवक्ताओं एवं विधि विशेषज्ञों के पैनल का गठन करने का अधिकार।

.3 उत्तरदायित्व (Responsibilities)

(क) राष्ट्रीय विधिक प्रकोष्ठ के निर्देशों का पालन एवं क्रियान्वयन।
(ख) सभी प्रमुख मामलों की नियमित रिपोर्ट राष्ट्रीय स्तर को भेजना।
(ग) जिला स्तर पर विधिक कार्यों की गुणवत्ता एवं अनुशासन सुनिश्चित करना।

: जिला स्तर – विधिक / न्याय प्रकोष्ठ के कार्य, अधिकार एवं उत्तरदायित्व
.1 कार्य (Functions)

(क) किसानों को प्राथमिक विधिक सहायता, परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान करना।
(ख) तहसील, जिला न्यायालय, प्रशासनिक कार्यालयों एवं पुलिस स्तर पर समन्वय स्थापित करना।
(ग) स्थानीय स्तर पर किसानों के अधिकारों के उल्लंघन की पहचान एवं दस्तावेजीकरण।
(घ) आरटीआई, शिकायत, आवेदन एवं अभ्यावेदन तैयार करने में सहायता करना।
(ङ) विधिक जागरूकता एवं कानून शिक्षा कार्यक्रमों का आयोजन।

.2 अधिकार (Powers)

(क) जिला स्तर पर सीमित विधिक सहायता एवं अभ्यावेदन जारी करने का अधिकार।
(ख) गंभीर मामलों को प्रदेश विधिक प्रकोष्ठ को संदर्भित करने का अधिकार।
(ग) स्थानीय अधिवक्ताओं एवं विधि स्वयंसेवकों से सहयोग लेने का अधिकार।

.3 उत्तरदायित्व (Responsibilities)

(क) प्रत्येक मामले का विधिवत अभिलेख, रसीद एवं रिपोर्ट तैयार रखना।
(ख) संगठन की प्रतिष्ठा, अनुशासन एवं संवैधानिक मर्यादा बनाए रखना।
(ग) किसी भी विधिक कार्रवाई में व्यक्तिगत या राजनीतिक दुरुपयोग से बचना।                                                                     ==राष्ट्रीय किसान यूनियन (सिद्धार्थ)
सदस्यता शुल्क एवं आजीवन सदस्यता नियम
अध्याय – सदस्यता के प्रकार

संगठन में निम्नलिखित प्रकार की सदस्यता होगी—

सामान्य सदस्य

सक्रिय सदस्य

आजीवन सदस्य

मानद सदस्य

: सामान्य सदस्यता
.1 योग्यता

(क) 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी किसान अथवा किसान हितैषी व्यक्ति।
(ख) संगठन के संविधान, उद्देश्यों एवं विचारधारा में आस्था रखने वाला व्यक्ति।

.2 सदस्यता शुल्क

₹100/- (एक सौ रुपये) प्रति वर्ष।

.3 अधिकार

(क) संगठन की सामान्य बैठकों में भाग लेने का अधिकार।
(ख) संगठन को सुझाव एवं शिकायत प्रस्तुत करने का अधिकार।

.4 सीमाएं

(क) मतदान का अधिकार नहीं होगा।
(ख) किसी भी पदाधिकारी पद अथवा निर्णायक समिति का सदस्य बनने का अधिकार नहीं होगा।

: सक्रिय सदस्यता
.1 योग्यता

(क) न्यूनतम एक वर्ष का सामान्य सदस्य अनुभव।
(ख) संगठनात्मक कार्यक्रमों एवं गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी।

.2 सदस्यता शुल्क

₹300/- (तीन सौ रुपये) प्रति वर्ष।

.3 अधिकार

(क) संगठनात्मक निर्वाचन में मतदान का अधिकार।
(ख) पदाधिकारी चयन एवं निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी।
(ग) विभिन्न प्रकोष्ठों/समितियों का सदस्य बनने की पात्रता।

: आजीवन सदस्यता (Life Membership)
.1 योग्यता

(क) संगठन की विचारधारा एवं उद्देश्यों में पूर्ण आस्था।
(ख) किसान हित में निरंतर एवं सक्रिय योगदान।

.2 एकमुश्त शुल्क

₹5,100/- (पाँच हजार एक सौ रुपये मात्र)।
उक्त राशि को राष्ट्रीय अथवा प्रदेश कार्यकारिणी द्वारा समय-समय पर संशोधित किया जा सकेगा।

.3 सदस्यता अवधि

आजीवन, अर्थात जब तक संगठन अस्तित्व में रहेगा।

.4 अधिकार

(क) स्थायी मतदान का अधिकार।
(ख) संगठन के किसी भी पद अथवा प्रकोष्ठ में नियुक्ति की पात्रता।
(ग) राष्ट्रीय एवं प्रदेश अधिवेशनों में भागीदारी का अधिकार।

.5 विशेष सुविधाएं

(क) आजीवन सदस्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।
(ख) संगठनात्मक दायित्वों में प्राथमिकता दी जा सकेगी।

: मानद सदस्यता
.1 योग्यता

(क) किसान हित में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्ति।
(ख) सामाजिक, शैक्षणिक, विधिक अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति।
.2 शुल्क

कोई सदस्यता शुल्क देय नहीं होगा।

.3 अधिकार

(क) संगठन को परामर्श एवं सुझाव देने का अधिकार।
(ख) मतदान अथवा निर्णयात्मक अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
– सदस्यता से संबंधित सामान्य नियम
: सामान्य प्रावधान

.1 सभी सदस्य संगठन के संविधान, उपविधियों एवं अनुशासनात्मक नियमों के अधीन होंगे।
.2 सदस्यता शुल्क का विधिवत रसीद एवं अभिलेख रखना अनिवार्य होगा।
.3 एक बार जमा की गई सदस्यता राशि किसी भी स्थिति में वापस नहीं की जाएगी।
.4 निर्धारित अवधि में सदस्यता नवीनीकरण न होने की स्थिति में सदस्य के अधिकार स्वतः स्थगित/समाप्त हो सकते हैं।
.5 अनुशासनहीनता अथवा संगठन विरोधी गतिविधि की स्थिति में सदस्यता निलंबित अथवा समाप्त की जा सकती है।

 सदस्यता समाप्ति
: सदस्यता समाप्ति के आधार

सदस्यता निम्नलिखित परिस्थितियों में समाप्त की जा सकती है—

(क) स्वयं लिखित त्यागपत्र देने पर।
(ख) संगठन विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर।
(ग) अनुशासन समिति की संस्तुति एवं सक्षम कार्यकारिणी के निर्णय पर।

विशेष संवैधानिक प्रस्ताव

संगठन का प्रत्येक पदाधिकारी कम-से-कम सक्रिय सदस्य अथवा आजीवन सदस्य होना अनिवार्य होगा।

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।