मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या
मैं जो हूँ जौन-एलिया हूँ जनाब इस का बेहद लिहाज़ कीजिएगा यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या
कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए ग़ज़ल देखिए सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूबसूरत हो
कौन इस घर की देख-भाल करे रोज़ इक चीज़ टूट जाती है बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
क्या सितम है कि अब तिरी सूरत
ग़ौर करने पे याद आती है
कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था
आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं
क्या कहा इश्क़ जावेदानी है! आख़िरी बार मिल रही हो क्या क्या कहा इश्क़ जावेदानी है! आख़िरी बार मिल रही हो क्या मुस्तक़िल बोलता ही रहता हूँ
कितना ख़ामोश हूँ मैं अंदर से
हम को यारों ने याद भी न रखा
जौन यारों के यार थे हम तो
मुझे अब तुम से डर लगने लगा है तुम्हें मुझ से मोहब्बत हो गई क्या सोचता हूँ कि उस की याद आख़िर
अब किसे रात भर जगाती है
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने
एक ही हादसा तो है और वो ये कि आज तक बात नहीं कही गई बात नहीं सुनी गई उस गली ने ये सुन के सब्र किया जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं और तो क्या था बेचने के लिए
अपनी आँखों के ख़्वाब बेचे हैं
दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते अब कोई शिकवा हम नहीं करते अब मिरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या
अब मिरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या
बिन तुम्हारे कभी नहीं आई क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को
अपने अंदाज़ से गँवाने का
हासिल-ए-कुन है ये जहान-ए-ख़राब यही मुमकिन था इतनी उजलत में तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले
अब बहुत देर में आज़ाद करूँगा तुझ को
हाँ ठीक है मैं अपनी अना का मरीज़ हूँ
आख़िर मिरे मिज़ाज में क्यूँ दख़्ल दे कोई
अब नहीं कोई बात ख़तरे की
अब सभी को सभी से ख़तरा है
कोई मुझ तक पहुँच नहीं पाता इतना आसान है पता मेरा हैं दलीलें तिरे ख़िलाफ़ मगर सोचता हूँ तिरी हिमायत में जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था
नहीं दुनिया को जब पर्वा हमारी तो फिर दुनिया की पर्वा क्यूँ करें हम
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प्रतिक्रिया डाउनलोड कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड ऐ शख़्स मैं तेरी जुस्तुजू से
बे-ज़ार नहीं हूँ थक गया हूँ टैग : जुस्तुजू
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प्रतिक्रिया डाउनलोड मुझ को आदत है रूठ जाने की
आप मुझ को मना लिया कीजे अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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आबले पड़ गए ज़बान में क्या टैग : ख़ामोशी
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नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम
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सो हम उस की बुराई करते हैं टैग : याद
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अब तो हर बात याद रहती है ग़ालिबन मैं किसी को भूल गया
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बात ही हम तमाम कर रहे हैं टैग : लब
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एक ही तो हवस रही है हमें अपनी हालत तबाह की जाए
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याद करना भी बेवफ़ाई है टैग्ज़ : बेवफ़ाई और 1 अन्य
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इक अजब हाल है कि अब उस को याद करना भी बेवफ़ाई है
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आप ने नाम तो लिया मेरा अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड जुर्म में हम कमी करें भी तो क्यूँ
तुम सज़ा भी तो कम नहीं करते अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड ये काफ़ी है कि हम दुश्मन नहीं हैं
वफ़ा-दारी का दावा क्यूँ करें हम अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
कुछ नहीं आसमान में रक्खा अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हो रहा हूँ मैं किस तरह बर्बाद
देखने वाले हाथ मलते हैं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड शौक़ है इस दिल-ए-दरिंदा को
आप के होंट काट खाने का टैग: लब
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अपने सब यार काम कर रहे हैं और हम हैं कि नाम कर रहे हैं
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इतना ख़ाली था अंदरूँ मेरा कुछ दिनों तो ख़ुदा रहा मुझ में
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प्रतिक्रिया डाउनलोड जाते जाते आप इतना काम तो कीजे मिरा
याद का सारा सर-ओ-सामाँ जलाते जाइए टैग: याद
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मिल रही हो बड़े तपाक के साथ मुझ को यकसर भुला चुकी हो क्या
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प्रतिक्रिया डाउनलोड तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी
कुछ अपना हाल सँभालूँ अगर इजाज़त हो टैग्ज़: आरज़ू और 2 अन्य
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वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी मोहब्बत अब इन लफ़्ज़ों का पीछा क्यूँ करें हम
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प्रतिक्रिया डाउनलोड अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड गँवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैं ने
वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने टैग्ज़: ज़िंदगी और 1 अन्य
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हर शख़्स से बे-नियाज़ हो जा
फिर सब से ये कह कि मैं ख़ुदा हूँ अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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ज़िंदगी क्या है इक कहानी है ये कहानी नहीं सुनानी है
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प्रतिक्रिया डाउनलोड ये बहुत ग़म की बात हो शायद
अब तो ग़म भी गँवा चुका हूँ मैं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड अपने सर इक बला तो लेनी थी
मैं ने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है टैग: ज़ुल्फ़
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शब जो हम से हुआ मुआफ़ करो नहीं पी थी बहक गए होंगे
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प्रतिक्रिया डाउनलोड ख़मोशी से अदा हो रस्म-ए-दूरी
कोई हंगामा बरपा क्यूँ करें हम टैग: ख़ामोशी
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रोया हूँ तो अपने दोस्तों में पर तुझ से तो हँस के ही मिला हूँ
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प्रतिक्रिया डाउनलोड सब मेरे बग़ैर मुतमइन हैं
मैं सब के बग़ैर जी रहा हूँ अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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और क्या चाहती है गर्दिश-ए-अय्याम कि हम अपना घर भूल गए उन की गली भूल गए
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मुझ से अब लोग कम ही मिलते हैं यूँ भी मैं हट गया हूँ मंज़र से
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प्रतिक्रिया डाउनलोड मुझ को ख़्वाहिश ही ढूँडने की न थी
मुझ में खोया रहा ख़ुदा मेरा टैग: ख़ुदा
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आज बहुत दिन बअद मैं अपने कमरे तक आ निकला था जूँ ही दरवाज़ा खोला है उस की ख़ुश्बू आई है
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हमारी ही तमन्ना क्यूँ करो तुम तुम्हारी ही तमन्ना क्यूँ करें हम
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प्रतिक्रिया डाउनलोड जानिए उस से निभेगी किस तरह
वो ख़ुदा है मैं तो बंदा भी नहीं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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मैं जुर्म का एतिराफ़ कर के कुछ और है जो छुपा गया हूँ
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प्रतिक्रिया डाउनलोड तेग़-बाज़ी का शौक़ अपनी जगह
आप तो क़त्ल-ए-आम कर रहे हैं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हम कहाँ और तुम कहाँ जानाँ
हैं कई हिज्र दरमियाँ जानाँ टैग: हिज्र
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फुलाँ से थी ग़ज़ल बेहतर फुलाँ की फुलाँ के ज़ख़्म अच्छे थे फुलाँ से
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क्या है जो बदल गई है दुनिया मैं भी तो बहुत बदल गया हूँ
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प्रतिक्रिया डाउनलोड ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं
शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं टैग्ज़: धन्यवाद ज्ञापन और 1 अन्य
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अब तुम कभी न आओगे यानी कभी कभी रुख़्सत करो मुझे कोई वादा किए बग़ैर
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हमारे ज़ख़्म-ए-तमन्ना पुराने हो गए हैं
कि उस गली में गए अब ज़माने हो गए हैं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड कल का दिन हाए कल का दिन ऐ जौन
काश इस रात हम भी मर जाएँ अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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ख़र्च चलेगा अब मिरा किस के हिसाब में भला सब के लिए बहुत हूँ मैं अपने लिए ज़रा नहीं
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प्रतिक्रिया डाउनलोड चाँद ने तान ली है चादर-ए-अब्र
अब वो कपड़े बदल रही होगी अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड अपने अंदर हँसता हूँ मैं और बहुत शरमाता हूँ
ख़ून भी थूका सच-मुच थूका और ये सब चालाकी थी अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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जौन’ उठता है यूँ कहो या’नी
‘मीर’-ओ-‘ग़ालिब’ का यार उठता है
किस से इज़हार-ए-मुद्दआ कीजे
आप मिलते नहीं हैं क्या कीजे
उस के होंटों पे रख के होंट अपने
बात ही हम तमाम कर रहे हैं
ये मत भूलो कि ये लम्हात हम को
बिछड़ने के लिए मिलवा रहे हैं
अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम
अब भी तुम मुझको जानती हो क्या
बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
और क्या चाहती है गर्दिश-ए-अय्याम कि हम
अपना घर भूल गए उन की गली भूल गए
इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं
सब के दिल से उतर गया हूँ मैं
उस के पहलू से लग के चलते हैं
हम कहीं टालने से टलते हैं
नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ
उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी
मुद्दतों बाद इक शख़्स से मिलने के लिए
आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें
ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँ करें हम
कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे
ये काफ़ी है कि हम दुश्मन नहीं हैं
वफ़ा-दारी का दावा क्यूँ करें हम
तू भी चुप है
मैं भी चुप हूँ
ये कैसी तन्हाई है
तेरे साथ तेरी याद आई
क्या तू सच मुच आई हैं
हुस्न के जाने कितने चेहरे
हुस्न के जाने कितने नाम
इश्क़ का पेशा हुस्न-परस्ती
इश्क़ बड़ा हरजाई है
आज बहुत दिन बाद मैं अपने कमरे तक आ निकला था
जो ही दरवाज़ा खोला है, उसकी खुशबू आई हैं।
ऐ शख्स मैं तेरी जुस्तुजू से
बे-जऱ नही हूँ
थक गया हूँ |
हम हैं मसरूफ़-ए-इंतिज़ाम मगर
जाने क्या इंतिज़ाम कर रहे हैं
है वो बेचारगी का हाल कि हम
हर किसी को सलाम कर रहे हैं
एक क़त्ताला चाहिए हम को
प्रतिक्रिया डाउनलोड तो क्या सच-मुच जुदाई मुझ से कर ली
तो ख़ुद अपने को आधा कर लिया क्या टैग: जुदाई
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अब तो उस के बारे में तुम जो चाहो वो कह डालो वो अंगड़ाई मेरे कमरे तक तो बड़ी रूहानी थी
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प्रतिक्रिया डाउनलोड मैं अब हर शख़्स से उक्ता चुका हूँ
फ़क़त कुछ दोस्त हैं और दोस्त भी क्या टैग्ज़: दोस्ती और 1 अन्य
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मुझ को तो कोई टोकता भी नहीं यही होता है ख़ानदान में क्या
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ये वार कर गया है पहलू से कौन मुझ पर था मैं ही दाएँ बाएँ और मैं ही दरमियाँ था
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आईनों को ज़ंग लगा अब मैं कैसा लगता हूँ
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प्रतिक्रिया डाउनलोड पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें
ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँ करें हम अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड दाद-ओ-तहसीन का ये शोर है क्यूँ
हम तो ख़ुद से कलाम कर रहे हैं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड मुझे अब होश आता जा रहा है
ख़ुदा तेरी ख़ुदाई जा रही है अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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जिस्म में आग लगा दूँ उस के और फिर ख़ुद ही बुझा दूँ उस को
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कौन से शौक़ किस हवस का नहीं दिल मिरी जान तेरे बस का नहीं
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आख़िरी बात तुम से कहना है याद रखना न तुम कहा मेरा
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है वो बेचारगी का हाल कि हम हर किसी को सलाम कर रहे हैं
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क्या पूछते हो नाम-ओ-निशान-ए-मुसाफ़िराँ हिन्दोस्ताँ में आए हैं हिन्दोस्तान के थे
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प्रतिक्रिया डाउनलोड तिरी क़ीमत घटाई जा रही है
मुझे फ़ुर्क़त सिखाई जा रही है अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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भूल जाना नहीं गुनाह उसे याद करना उसे सवाब नहीं
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सब से पुर-अम्न वाक़िआ ये है आदमी आदमी को भूल गया
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प्रतिक्रिया डाउनलोड ख़ूब है शौक़ का ये पहलू भी
मैं भी बर्बाद हो गया तू भी अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड उस ने गोया मुझी को याद रखा
मैं भी गोया उसी को भूल गया टैग: याद
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मैं इस दीवार पर चढ़ तो गया था उतारे कौन अब दीवार पर से
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प्रतिक्रिया डाउनलोड मिल कर तपाक से न हमें कीजिए उदास
ख़ातिर न कीजिए कभी हम भी यहाँ के थे टैग: स्वागत
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हम जो अब आदमी हैं पहले कभी जाम होंगे छलक गए होंगे
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इक शख़्स कर रहा है अभी तक वफ़ा का ज़िक्र काश उस ज़बाँ-दराज़ का मुँह नोच ले कोई
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प्रतिक्रिया डाउनलोड उस से हर-दम मोआमला है मगर
दरमियाँ कोई सिलसिला ही नहीं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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सारी गली सुनसान पड़ी थी बाद-ए-फ़ना के पहरे में हिज्र के दालान और आँगन में बस इक साया ज़िंदा था
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हम हैं मसरूफ़-ए-इंतिज़ाम मगर जाने क्या इंतिज़ाम कर रहे हैं
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गो अपने हज़ार नाम रख लूँ पर अपने सिवा मैं और क्या हूँ
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हम ने क्यूँ ख़ुद पे एतिबार किया
सख़्त बे-एतिबार थे हम तो अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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इक अजब आमद-ओ-शुद है कि न माज़ी है न हाल जौन बरपा कई नस्लों का सफ़र है मुझ में
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अपने सभी गिले बजा पर है यही कि दिलरुबा मेरा तिरा मोआमला इश्क़ के बस का था नहीं
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हम यहाँ ख़ुद आए हैं लाया नहीं कोई हमें
और ख़ुदा का हम ने अपने नाम पर रक्खा है नाम टैग: ख़ुदा
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मैं बिस्तर-ए-ख़याल पे लेटा हूँ उस के पास सुब्ह-ए-अज़ल से कोई तक़ाज़ा किए बग़ैर
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प्रतिक्रिया डाउनलोड ख़ुदा से ले लिया जन्नत का वअदे
ये ज़ाहिद तो बड़े ही घाग निकले अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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हो कभी तो शराब-ए-वस्ल नसीब पिए जाऊँ मैं ख़ून ही कब तक
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जम्अ हम ने किया है ग़म दिल में इस का अब सूद खाए जाएँगे
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अब नहीं मिलेंगे हम कूचा-ए-तमन्ना में कूचा-ए-तमन्ना में अब नहीं मिलेंगे हम
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जान-ए-मन तेरी बे-नक़ाबी ने आज कितने नक़ाब बेचे हैं
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शाम हुई है यार आए हैं यारों के हमराह चलें आज वहाँ क़व्वाली होगी जौन चलो दरगाह चलें
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जौन दुनिया की चाकरी कर के तू ने दिल की वो नौकरी क्या की
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प्रतिक्रिया डाउनलोड फिर उस गली से अपना गुज़र चाहता है दिल
अब उस गली को कौन सी बस्ती से लाऊँ मैं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड अब ख़ाक उड़ रही है यहाँ इंतिज़ार की
ऐ दिल ये बाम-ओ-दर किसी जान-ए-जहाँ के थे
नई ख़्वाहिश रचाई जा रही है तिरी फ़ुर्क़त मनाई जा रही है
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हमें शिकवा नहीं इक दूसरे से
मनाना चाहिए इस पर ख़ुशी क्या अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड याद आते हैं मोजज़े अपने
और उस के बदन का जादू भी टैग्ज़: बदन और 1 अन्य
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किया था अहद जब लम्हों में हम ने तो सारी उम्र ईफ़ा क्यूँ करें हम
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मैं कहूँ किस तरह ये बात उस से तुझ को जानम मुझी से ख़तरा है
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घर से हम घर तलक गए होंगे अपने ही आप तक गए होंगे
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हम अजब हैं कि उस की बाहोँ में शिकवा-ए-नारसाई करते हैं
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मैं सहूँ कर्ब-ए-ज़िंदगी कब तक रहे आख़िर तिरी कमी कब तक
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प्रतिक्रिया डाउनलोड तुझ को ख़बर नहीं कि तिरा कर्ब देख कर
अक्सर तिरा मज़ाक़ उड़ाता रहा हूँ मैं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड मुझ को ये होश ही न था तू मिरे बाज़ुओं में है
यानी तुझे अभी तलक मैं ने रिहा नहीं किया अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड ज़माना था वो दिल की ज़िंदगी का
तिरी फ़ुर्क़त के दिन लाऊँ कहाँ से अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हमला है चार सू दर-ओ-दीवार-ए-शहर का
सब जंगलों को शहर के अंदर समेट लो अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हम को हरगिज़ नहीं ख़ुदा मंज़ूर
यानी हम बे-तरह ख़ुदा के हैं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो
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प्रतिक्रिया डाउनलोड एक क़त्ताला चाहिए हम को
हम ये एलान-ए-आम कर रहे हैं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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छेड़ना ही तो बस नहीं छू भी अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड कुछ तो रिश्ता है तुम से कम-बख़्तों
कुछ नहीं कोई बद-दुआ भेजो अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड अब कि जब जानाना तुम को है सभी पर एतिबार
अब तुम्हें जानाना मुझ पर एतिबार आया तो क्या अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड इन लबों का लहू न पी जाऊँ
अपनी तिश्ना-लबी से ख़तरा है अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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राएगाँ वस्ल में भी वक़्त हुआ पर हुआ ख़ूब राएगाँ जानाँ
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मैं ले के दिल के रिश्ते घर से निकल चुका हूँ दीवार-ओ-दर के रिश्ते दीवार-ओ-दर में होंगे
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प्रतिक्रिया डाउनलोड इक हुस्न-ए-बे-मिसाल की तमसील के लिए
परछाइयों पे रंग गिराता रहा हूँ मैं अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हाए वो उस का मौज-ख़ेज़ बदन
मैं तो प्यासा रहा लब-ए-जू भी टैग: बदन
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शायद वो दिन पहला दिन था पलकें बोझल होने का मुझ को देखते ही जब उस की अंगड़ाई शर्माई है
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प्रतिक्रिया डाउनलोड न रखा हम ने बेश-ओ-कम का ख़याल
शौक़ को बे-हिसाब ही लिक्खा अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड शीशे के इस तरफ़ से मैं सब को तक रहा हूँ
मरने की भी किसी को फ़ुर्सत नहीं है मुझ में अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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प्रतिक्रिया डाउनलोड ऐ सुब्ह मैं अब कहाँ रहा हूँ
ख़्वाबों ही में सर्फ़ हो चुका हूँ अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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साबित हुआ सुकून-ए-दिल-ओ-जाँ कहीं नहीं रिश्तों में ढूँढता है तो ढूँडा करे कोई
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पूछ न वस्ल का हिसाब हाल है अब बहुत ख़राब रिश्ता-ए-जिस्म-ओ-जाँ के बीच जिस्म हराम हो गया
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मुझे ग़रज़ है मिरी जान ग़ुल मचाने से न तेरे आने से मतलब न तेरे जाने से
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दो जहाँ से गुज़र गया फिर भी मैं रहा ख़ुद को उम्र भर दरपेश
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उस के होंठों पे रख के होंठ अपने बात ही हम तमाम कर रहे हैं
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प्रतिक्रिया डाउनलोड रखो दैर-ओ-हरम को अब मुक़फ़्फ़ल
कई पागल यहाँ से भाग निकले अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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किस से इज़हार-ए-मुद्दआ कीजे आप मिलते नहीं हैं क्या कीजे
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प्रतिक्रिया डाउनलोड आप अपनी गली के साइल को
कम से कम पर सवाल तो रखिए अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए शेयर कीजिए
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मरहम-ए-हिज्र था अजब इक्सीर अब तो हर ज़ख़्म भर गया होगा
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बहुत कतरा रहे हू मुग़्बचों से गुनाह-ए-तर्क-ए-बादा कर लिया क्या
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प्रतिक्रिया डाउनलोड जौन जुनूब-ए-ज़र्द के ख़ाक-बसर ये दुख उठा
मौज-ए-शिमाल-ए-सब्ज़-जाँ आई थी और चली गई टैग: दर्द
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मिरी शराब का शोहरा है अब ज़माने में सो ये करम है तो किस का है अब भी आ जाओ
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प्रतिक्रिया डाउनलोड हम तिरा हिज्र मनाने के लिए निकले हैं
शहर में आग लगाने के लिए निकले हैं टैग: व्हाट्सऐप
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सोचा है कि अब कार-ए-मसीहा न करेंगे वो ख़ून भी थूकेगा तो पर्वा न करेंगे
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ये पैहम तल्ख़-कामी सी रही क्या मोहब्बत ज़हर खा कर आई थी क्या
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रेहन सरशारी-फ़ज़ा के हैं आज के बाद हम हवा के हैं
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प्रतिक्रिया डाउनलोड किसी के बिन किसी की याद के बिन
जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो
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