पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 1 से 3 सितंबर तक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के विभिन्न टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्यों के वन अधिकारी शामिल होंगे।


वर्ष 2026 में होने वाली राष्ट्रीय बाघ गणना के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 1 से 3 सितंबर तक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के विभिन्न टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्यों के वन अधिकारी शामिल होंगे। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य बाघों की संख्या का सही आकलन करने के लिए वन अधिकारियों को प्रशिक्षित करना है। इस दौरान वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ बाघ गणना की बारीकियां समझाएंगे।

शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी व शारदा की तराई में बसे जंगलों को तराई का आर्कलैंड कहा जाता है। जैवविविधता के लिहाज से इस क्षेत्र को काफी संपन्न माना जाता है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के 730 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जंगल को बेहतर ग्रासलैंड और पर्याप्त जलस्रोतों के चलते यहां वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है‌। महज 4 साल में बाघों की संख्या दोगुनी होने के चलते पीलीभीत टाइगर रिजर्व अंतरराष्ट्रीय TX2 अवार्ड भी हासिल कर चुका है। संरक्षण मॉडल के लिहाज़ से भी इस टाइगर रिज़र्व को काफी अधिक सराहा जा रहा है 1 से 3 सितम्बर के मध्य यहां वर्ष 2026 में होने वाली बाघ गणना के लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा हैं। इस प्रशिक्षण में उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क शामिल होंगे। इनमें उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क व कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, यूपी के पीलीभीत, दुधवा व अमानगढ़ टाइगर रिजर्व शामिल हैं। इसके साथ ही उत्तराखंड की नंधौर वाइल्डलाइफ सेंचुरी, यूपी की किशनपुर, सुहेलवा, कतर्नियाघाट व दक्षिण खीरी वन प्रभाग शामिल होंगे। यह सभी अभ्यारण्य बाघ संरक्षण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हैं। इससे पूर्व वर्ष 2022 में बाघों गणना हुई थी। वर्ष 2022 की राष्ट्रीय बाघ गणना के दौरान पीटीआर को 365 ग्रिड में विभाजित किया गया था, जो प्रत्येक 2 वर्ग किलोमीटर को कवर करता था। वहीं दुधवा टाइगर रिजर्व व इसमें शामिल (दुधवा नेशनल पार्क, कतर्नियाघाट और किशनपुर) सहित, 887 ग्रिड में विभाजित किया गया था। बाघों की तस्वीरें लेने के लिए प्रत्येक ग्रिड में दो कैमरा ट्रैप लगाए गए थे। बाघों के शिकार जिसमे विशेष रूप से बड़े खुर वाले जानवरों का आकलन करने के लिए दुधवा में 114 और पीटीआर में 54 ट्रांसेक्ट लाइन स्थापित की गई थी।

बाघों की गणना करने की प्रक्रिया इतनी सरल नहीं होती। इसके लिए घने जंगलों के बीच बाघों की संभावित मौजूदगी वाले स्थानों में मौजूद पेड़ों पर ठीक आमने-सामने 2 ट्रैप कैमरे लगाए जाते हैं, जिनमें लगा सेंसर किसी भी वन्यजीव के आने-जाने पर उनकी तस्वीर कैद कर लेता है। इसके बाद तय समय तक कैमरे में कैद की गई तस्वीरों में से बाघों की तस्वीरों को अलग किया जाता है। बाघों की धारियां, मानवों के फिंगरप्रिंट जैसी यूनिक होती हैं, बाघों के शरीर पर मौजूद धारियों की तस्वीरों के आधार पर विशेषज्ञ संख्या का अनुमान लगाते हैं।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में राष्ट्रीय बाघ गणना के लिए वन कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रोटोकॉल के अनुसार वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों द्वारा बाघ गणना की ट्रेनिंग दी जाएगी।

राजकुमार वर्मा 
पीलीभीत

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