जिंदगी में जो


मेरे जीवन का अनुभव है ये

जिंदगी में जो
बचत नहीं कर पाते हैं
कठिनाईक जीवन गुजारने के
उनके हालात हो जाते है
खुशियों के पल भी उनके
उधार होते हैं

कई बार योग्यता के बावजूद भी
जीवन में हार मिलती है
यह वही हालात है
जिससे लोग हताश होते हैं
हताश लोग कमजोर और
फिर शोषण का शिकार होते हैं

खुद के दम पर ही
गुजारनी पड़ती है
खुशहाल जिंदगी
पग पग पर बिछा है
यहां स्वार्थों का झमेला
यहां कहां निस्वार्थ किसी के
फरिश्ताई किरदार होते हैं

गरीबों पर तो बेवजह ही
संदेह करती है नादान दुनिया
मछली जितनी बड़ी हो
उतनी ही बड़ी उसकी
खुराक होती है
गरीब की खुराक है दो रोटी की
अमीर की खुराक
पूरा बाजार होते है
सीताराम अम्बेडकर
सामाजिक राजनीतिक एक्टिविस्ट

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