राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि ललई सिंह यादव ने सदैव समाज के वंचित, शोषित, दलित, पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने अन्याय, भेदभाव और अंधविश्वास के खिलाफ सामाजिक क्रांति का बिगुल फूंका। "सच्ची रामायण" जैसी कृति ने भारतीय समाज में जागरूकता की अलख जगाने का कार्य किया और


सीतापुर। प्रदेश किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी तथा डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने आज सीतापुर में आयोजित एक विचार गोष्ठी को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने महान क्रांतिकारी, दलित चेतना के अग्रदूत तथा "सच्ची रामायण" के रचयिता महामानव ललई सिंह यादव के जीवन और उनके योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला।

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि ललई सिंह यादव ने सदैव समाज के वंचित, शोषित, दलित, पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने अन्याय, भेदभाव और अंधविश्वास के खिलाफ सामाजिक क्रांति का बिगुल फूंका। "सच्ची रामायण" जैसी कृति ने भारतीय समाज में जागरूकता की अलख जगाने का कार्य किया और कमजोर वर्गों को अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि आज भी जब समाज में समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई जारी है, तब ललई सिंह यादव का जीवन और विचार हमें दिशा दिखाते हैं। उनका व्यक्तित्व केवल एक लेखक या विचारक तक सीमित नहीं था, बल्कि वे समाज सुधारक, जननेता और क्रांतिकारी भी थे।

सभा को संबोधित करते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर और ज्योतिराव फुले की तरह ललई सिंह यादव भी सामाजिक न्याय की परंपरा के मजबूत स्तंभ थे। उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को सम्मान दिलाने के लिए कलम को हथियार बनाया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और जनता उपस्थित रही। वक्ताओं ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि ललई सिंह यादव के विचारों को गांव-गांव और गली-गली तक पहुँचाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी उनके संघर्ष और त्याग से प्रेरणा ले सकें।

कार्यक्रम में जिले के अनेक बुद्धिजीवी, समाजसेवी, किसान नेता और युवा बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि समाज में भाईचारा, समानता और न्याय की स्थापना के लिए ललई सिंह यादव के विचारों को व्यवहार में उतारना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

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