प्रश्न : 9 जाति का अर्थ बताते हुए उसकी परिभाषा एवं विशेषतायें बताइये।


प्रश्न : 9 जाति का अर्थ बताते हुए उसकी परिभाषा एवं विशेषतायें बताइये।

उत्तर-

जाति का अर्थ एवं परिभाषा-
 

जाति शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘कास्ट' (Caste) का हिन्दी रूपान्तरण है। अंग्रेजी के ‘Caste' शब्द की उत्पत्ति पुर्तगाली भाषा के शब्द “Casta (कास्टा) से हुई है, जिसका तात्पर्य प्रजाति, नस्ल या भेद है। यह शब्द लैटिन भाषा के शब्द (कास्टस) Castus' के अत्यन्त निकट है, जिसका अर्थ विशुद्ध है। ‘कास्टा' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम सन् 1665 में ग्रेसियाडिओट (Graciadeorta) ने प्रजातीय समूहों के विभेद के लिए किया था। जाति व्यवस्था का प्रभाव भारत में रहने वाले अन्य धार्मिक समूहों, जैसे-मुसलमान, ईसाई, बौद्ध, जैन एवं सिक्खों की सामाजिक व्यवस्था पर भी दिखाई पड़ता है। भारत में अनुमानत: तीन हजार से अधिक जातियाँ और उनकी अनेकानेक उपजातियाँ पायी जाती हैं। शास्त्र वर्णित सैद्धान्तिक आधार के अतिरिक्त जातियों की सामाजिक संरचना, प्रथा, परम्परा, रुढ़ियों, रीतियों तथा व्यवसायों पर आधारित है। फिर भी मुख्यत: जाति प्रथा जन्मगत भेद पर आधारित एक व्यवस्था है।

विभिन्न विद्वानों के अनुसार जाति की परिभाषा निम्नलिखित है -

(1) जे. एच. हट्टन के अनुसार- “जाति एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके अन्तर्गत एक समाज अनेक आत्मकेन्द्रित एवं एक-दूसरे से पूर्णत: पृथक् इकाइयों (जातियों) में विभाजित रहता है, इन इकाइयों के बीच पारस्परिक सम्बन्ध ऊँच-नीच के आधार पर सांस्कारिक रूप से निर्धारित होते हैं।”

(2) सर हर्बर्ट रिजले के अनुसार-“जाति परिवारों या कई परिवारों के समूहों का संकलन है, जिसको एक सामान्य नाम दिया गया है, जो किसी काल्पनिक पुरुष या देवता से अपनी उत्पत्ति मानता है तथा पैतृक व्यवसाय को स्वीकार करता है और जो लोग विचार कर सकते हैं, उन लोगों के लिए एक सजातीय समूह के रूप में स्पष्ट होता है।”

जाति प्रथा की विशेषताएँ- एन. के. दत्ता ने जाति प्रथा की निम्नलिखित संरचनात्मक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं का उल्लेख किया है-

(1) एक जाति के सदस्य अपनी जाति से बाहर विवाह नहीं कर सकते।

(2) विभिन्न जातियों के बीच खानपान सम्बन्धी प्रतिबन्ध पाये जाते हैं।

(3) अधिकतर जातियों के व्यवसाय निश्चित होते हैं।

(4) जातियों में ऊँच-नीच का संस्तरण पाया जाता है।

(5) जन्म ही मनुष्य की जाति को निर्धारित करता है। जाति के नियमों को तोड़ने पर ही जाति से बहिष्कृत किया जाता है। अन्यथा एक जाति से दूसरी जाति में जाना सम्भव नहीं है।

(6) सम्पूर्ण जाति व्यवस्था ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा पर आधारित है।

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