दत्तात्रेय होसबले ने कहा- RSS को समझने के लिए दिमाग नहीं, दिल चाहिए; मत और संप्रदाय को एक मानता है संघ


राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ(आरएसएस ) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोलेने कहा कि संघ को समझने के लिए दिमाग नहीं दिल चाहिए,केवल दिमाग से काम नहीं चलेगा, क्योंकि दिल और दिमाग बनाना ही आरएसएस का कार्य है। उन्होंने कहा कि यह हिंदू राष्ट्र है, क्योंकि इस देश को बनाने वाले भी हिंदू है। विभिन्न लेखकों की पुस्तकों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को पितृ भूमि मानने वाले हिंदू है। जो स्वंय को हिंदू माने वो हिंदू है।

अस्पश्यता को खत्म करने में भूमिका निभाई है आरएसएस

उन्होंने कहा,अस्पश्यता पाप नहीं तो दुनिया में कुछ भी पाप नहीं है। आरएसएस ने अस्पश्यता को खत्म करने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि साम्यवाद से लेकर समाजवाद सहित सभी काल में आरएसएस की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आरएसएस सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर जोर दिया है। संघ कठोर (रिजिड) नहीं है संघ लचीला (फ्लैक्सीबल) है। भारत के मत और संप्रदाय को एक मानता है। अपने मत संप्रदाय की चीजों को बरकरार रखते हुए लोग संघ कार्य कर सकते हैं।

देश में लोकतंत्र की स्थापना में संघ की रही है भूमिका

उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र की स्थापना में संघ की भूमिका रही है। राइट विंग ही नहीं लेफ्ट विंग भी नहीं,संघ सिर्फ राष्ट्रहित का काम करने वाला है। हम राष्ट्रवादी हैं। नेशनलिस्ट हैं। आज राष्ट्र जीवन के केंद्र बिंदू पर संघ है। संघ व्यक्ति निर्माण और समाज निर्माण का कार्य करता रहेगा। होसबोले ने कहा,संघ के एक लाख सेवा कार्य चलते हैं। संघजनरेटर की तरह काम करता है। संघ एक जीवनपद्धति है। संघ एक कार्यपद्धति और जीवनशैली है

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