कार्य बहिष्कार के बीच बैनामा रजिस्ट्री पर बवाल, अधिवक्ताओं ने की तोड़फोड़
गोरखपुर स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के विरोध में चल रहे कार्य बहिष्कार के दौरान नौ बैनामों की रजिस्ट्री होने से अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा।
महमूदाबाद के सकरन/सदरपुर थाना क्षेत्र का मामला; ग्रीष्मकालीन अवकाश का फायदा उठाकर विपक्षीगणों ने पुलिस की मिलीभगत से खड़ी की बाउंड्रीवॉल, पीड़ित ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार।
रिपोर्ट ए के विश्वकर्मा अब तक न्याय
महमूदाबाद (सीतापुर):
उत्तर प्रदेश में भू-माफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ शासन की सख्त हिदायतों के बावजूद स्थानीय स्तर पर सांठ-गांठ का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जनपद के थाना सदरपुर अंतर्गत ग्राम बजेहरा से एक पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) सीतापुर को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि न्यायालय में दीवानी मुकदमा लंबित होने और कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश (गर्मियों की छुट्टियां) होने का फायदा उठाकर गांव के ही करीब आधा दर्जन से अधिक दबंगों ने पुलिस की शह पर उसकी पुश्तैनी आबादी की जमीन पर जबरन अवैध कब्जा कर लिया है। विरोध करने पर पीड़ित को जान से मारने और गांव में ही उसकी कब्र खोद देने की खुलेआम धमकी दी जा रही है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, ग्राम बजेहरा निवासी सामून पुत्र मुस्तफा की अपनी पैतृक संपत्ति आबादी की जमीन है, जिस पर वह और उसका परिवार पुश्तों से काबिज चला आ रहा है। पीड़ित सामून ने बताया कि गांव के ही अलीहसन पुत्र मेहंदी, मोबीन पुत्र अलीहसन, अलीहसन की पत्नी, उमर पुत्र अनवर, अफ्तार पुत्र आसीम, खालिक पुत्र अब्बास, नबी अहमद पुत्र मुमताज और कुलदीप विश्वकर्मा पुत्र गैंदू आदि विपक्षीगण एकराय होकर योजनाबद्ध तरीके से उसकी इस कीमती भूमि को हड़पना चाहते हैं। लगातार मिल रही धमकियों के बाद पीड़ित ने वर्ष 2026 में माननीय न्यायालय सिविल जज (जूनियर डिविजन) महमूदाबाद, सीतापुर में एक दीवानी वाद दायर किया था, जिसका वाद संख्या 143/2026 है और मामला वर्तमान में विचाराधीन है।
थाने में सादे कागज पर अंगूठा लगवाने का गंभीर आरोप
थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पीड़ित ने बताया कि 16 जून 2026 को शिकायती पत्र देने के बाद 17 जून को उसे थाने बुलाया गया। वहां विपक्षी पहले से ही मौजूद थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने दबंगों का साथ देते हुए पीड़ित से सादे कागज पर जबरन अंगूठा लगवा लिया और उसे अजमेरी पीर बाबा की कसम खिलाकर दोबारा कहीं शिकायत न करने का दबाव बनाया। पुलिस ने मामले को महज एक शौचालय निर्माण की सुलह दिखाकर रफा-दफा कर दिया, जबकि उसकी आड़ में दबंगों ने पूरी जमीन पर ऊंची-ऊंची बाउंड्री खड़ी कर ली।
पीड़ित का कहना है कि वर्तमान में न्यायालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है, जिसके कारण अदालत से तत्काल स्थगन आदेश (स्टे) ले पाना संभव नहीं था। इसी प्रशासनिक लाचारी का फायदा उठाकर विपक्षीगणों ने योजनाबद्ध तरीके से ईद के ठीक दो दिन बाद पीड़ित की जमीन पर धावा बोल दिया। जब सामून ने इसका विरोध किया, तो दबंगों ने उसे लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटने का प्रयास किया और जातिसूचक व अभद्र गालियां दीं। दबंगों ने खुलेआम चुनौती दी कि "अगर मुकदमा वापस नहीं लिया, तो इसी जमीन में तुम्हारी कब्र खोद देंगे।"
मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब स्थानीय सदरपुर थाना पुलिस ने भी पीड़ित की मदद करने के बजाय दबंगों का पक्ष लिया। पीड़ित के मुताबिक, जब उसने पुलिस से शिकायत की तो मौके पर पहुंची पुलिस ने उल्टे उसी को धमकाते हुए कहा कि "विपक्षीगण कोर्ट से स्टे लेकर आए हैं, हम कुछ नहीं कर सकते, उन्हें काम करने दो।" पुलिस ने पीड़ित को चुनौती दी कि यदि वह सच्चा है तो खुद कोर्ट से स्टे लेकर आए, जबकि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान कोर्ट बंद हैं। इस दौरान पुलिस की मौजूदगी में ही दबंगों ने पीड़ित की जमीन पर ईंटें गिरवाकर धड़ल्ले से निर्माण कार्य पूरा कर लिया।
पीड़ित सामून ने अब पुलिस अधीक्षक महोदय के समक्ष हाजिर होकर अपनी आपबीती सुनाई है और फिंगरप्रिंट प्रमाणित प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, पुलिस-भूमाफिया सांठ-गांठ को उजागर करने तथा अपनी जमीन से अवैध अतिक्रमण हटवाकर न्याय प्रदान करने की भावुक अपील की है। क्षेत्र में पुलिस की इस संदिग्ध भूमिका को लेकर ग्रामीणों में भी भारी रोष व्याप्त है और लोग अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर नजरें टिकाए हुए हैं।
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