2,000 रुपये महीने से कम में घर लाएं ये तीन स्मार्टफोन, फ्लिपकार्ट पर मिल रहा ऑफर
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: हीमोफीलिया एक गंभीर मेडिकल कंडीशन है, जिसमें मरीज के शरीर में चोट लगने पर खून बहना बंद नहीं होता है। इससे कई दूसरी परेशानियां भी पैदा हो जाती है। जानिए इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है और किन बातों का ध्यान रखें।
हीमोफीलिया को एक दुर्लभ ब्लड डिसऑर्डर के रूप में जाना जाता है। जिसमें मरीज को अगर कहीं चोट लग जाए या नाक से खून आने लगे को खून रुकने का नाम नहीं लेता है। ज्यादा खून बहने से इंसान को कई मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। इस कंडीशन में पीड़ित के शरीर में खून जमना बंद हो जाता है। ब्लड क्लॉट न हो पाने से ऐसे लोगों का खून ज्यादा बह जाता है। जरा सी चोट लगने पर गंभीर ब्लीडिंग होने लगती है। ज्यादा खून आने से चक्कर, जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न जैसी समस्याएं पैदा हो जाती है। जानिए हीमोफीलिया के लक्षण क्या हैं और इसे कैसे कंट्रोल कर सकते हैं।
हीमोफीलिया 2 तरह का होता है जिसमें टाइप ए और टाइप बी होता है। अलग-अलग जेनेटिक म्यूटेशन की वजह से ये होता है। हीमोफिलिया ए काफी आम डिसऑर्डर है, जो F8 जीन में म्यूटेशन से होता है। वहीं हीमोफिलिया बी, F9 जीन में म्यूटेशन के कारण होता है। हीमोफीलिया का इलाज नहीं है सिर्फ इसे मैनेज किया जा सकता है।
जोड़ों और ब्रेन में ब्लीडिंग- हीमोफीलिया के मरीज को जोड़ों के पास वाले टिशूज में ब्लीडिंग हो सकती है। जिसे हेमर्थ्रोसिस कहते हैं। इससे जड़ों में दर्द रहता है और लालिमा आने लगती है। कुछ लोगों को हिलना-डुलना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार दिमाग में ब्लीडिंग होने पर इमरजेंसी कंडीशन हो सकती है। इसमें पैरालिसिस का खतरा भी हो सकता है।
मसल्स में खून आना- ऐसी स्थिति में कुछ लोगों को मांसपेशियों में भी ब्लीडिंग होने सकती है। इससे मसल्स टिशू डैमेज होने लगते हैं। ऐसा होने से मरीज को दर्द, सूजन और टेंडरनेस की समस्या परेशान कर सकती है। जिस जगह पर ब्लीडिंग हुई है वहां की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।
जल्दी चोट लगना- हीमोफीलिया के मरीज को जरा सी चोट लगने पर ही खून निकलने लगता है। आसानी से चोट लग जाती है और कई बार स्किन पर लाल और बैंगनी रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। ऐसा स्किन के अंदर ब्लीडिंग होने के कारण होता है। ऐसा ब्लड वेसल्स फटने और टिशू में ब्लड लीक होने से होता है।
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और नाक से ब्लीडिंग- अगर स्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग हो रही है तो इससे काली पॉटी आने लगती है। उल्टी होने का खतरा रहता है। पेट में दर्द और सूजन आ सकती है। इसके अलावा नाक से खून बहने पर रोकना मुश्किल हो जाता है। बार-बार खून बहने से मरीज एनीमिया का शिकार हो सकता है।
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