बनारस में किसानों की जमीन उद्योगपतियों को देने का आरोप, पुलिस-प्रशासन के दबाव से किसान परेशान


बनारस में किसानों की जमीन उद्योगपतियों को देने का आरोप, पुलिस-प्रशासन के दबाव से किसान परेशान

गिरजा शंकर अवस्थी/अब तक न्याय 

किसानों से मिलना मेरा संवैधानिक अधिकार – शालिनी सिंह पटेल

बनारस | 19 जनवरी 2026

बनारस क्षेत्र में किसानों की कृषि भूमि को विकास एवं औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर बड़े उद्योगपतियों को देने को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं, इसके बावजूद उन पर मानसिक, प्रशासनिक और सामाजिक दबाव बनाया जा रहा है, जो असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है।

किसानों ने बताया कि जब वे आपस में बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्याओं और भविष्य को लेकर चर्चा करना चाहते हैं, तो स्थानीय पुलिस द्वारा उन्हें रोका जाता है। पुलिस की ओर से यह कहा जाता है कि मंडल स्तर के अधिकारी, संभवतः आईजी से अनुमति लेने के बाद ही किसान एकत्र हो सकते हैं। इतना ही नहीं, यदि कोई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता या राजनीतिक नेता किसानों से मिलने का प्रयास करता है, तो उसे भी पुलिस-प्रशासन द्वारा रोका जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और दबाव का माहौल बन गया है।

इस पूरे मामले पर जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं यूपी प्रभारी बुंदेलखंड शालिनी सिंह पटेल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसानों की सहमति के बिना उनकी जमीन लेना संविधान और कानून दोनों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि किसानों का आपस में बैठकर चर्चा करना, अपनी बात रखना और जनप्रतिनिधियों से मिलना उनका मौलिक और संवैधानिक अधिकार है, जिसे कोई भी प्रशासन या सरकार नहीं छीन सकती।

शालिनी सिंह पटेल ने स्पष्ट किया कि वह शीघ्र ही स्वयं बनारस जाकर किसानों से प्रत्यक्ष संवाद करेंगी और उनकी समस्याओं, आशंकाओं व मांगों को पूरी जिम्मेदारी के साथ सरकार और संगठन के समक्ष रखेंगी। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की आवाज उठाने के कारण उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई होती है, मुकदमे दर्ज किए जाते हैं या दबाव बनाया जाता है, तो वह इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि जनता दल यूनाइटेड भले ही सरकार का हिस्सा हो, लेकिन पार्टी की समाजवादी विचारधारा किसानों, युवाओं, महिलाओं, मजदूरों, दिव्यांगों और पत्रकारों सहित समाज के हर वर्ग के अधिकारों के साथ खड़े होने की है। गठबंधन का अर्थ कभी भी जनता की आवाज को दबाना नहीं हो सकता।

अंत में शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि वह स्वयं किसान की बेटी हैं, मिट्टी में पली-बढ़ी हैं और किसान का दर्द, मेहनत व संघर्ष भली-भांति जानती हैं। यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि किसान के सम्मान, अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है।

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