मध्य प्रदेश पुलिस की खुलती पोल बलात्कार के आरोपियों को पैदल जेल ले जाते हुए दिखाई दिए पुलिस जवान


मध्य प्रदेश पुलिस की खुलती पोल बलात्कार के आरोपियों को पैदल जेल ले जाते हुए दिखाई दिए पुलिस जवान

महू। मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश को अपराध मुक्त करने के लिए लाख दावे कर ले,लेकिन सुविधाओ के नाम पर कुछ ओर ही नजारा देखने को मिला। हम बात कर रहे है इंदौर जिले के महू सिमरोल थाने की जहां गौशाला स्थित पेंशनपूरा रोड पर एक तस्वीर ने तमाम प्रशासनिक दावे खोल दिए। ऐसा नजारा देखकर झंकझौंर कर दिया। सिमरोल थाने में एक नाबालिग लड़की ने आरोपी रोहित पिता काशीराम 20 वर्षीय और देवकरण पिता अजय 19 वर्षीय निवासी देवघट चोरल के खिलाफ बलात्कार सहित पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करवाया था। सिमरोल पुलिस ने दोनो ही आरोपियों को गिरफ्तार कर महू न्यायालय में पेश किया जहां से दोनो को महू उपजेल भेज दिया। परंतु सिमरोल थाने के आरक्षक ब्रजेश मुखरिया और सैनिक देवराज बरवट दोनो बलात्कार के आरोपियों को महू न्यायालय से तकरीबन पांच किलो मीटर दूर तक पैदल महूउप जेल तक ले जाते हुए दिखाई दिए। यह नजारा देखकर लोग भी हैरत में पड़ गए। 

क्या था मामला.... 

एक नाबालिग लड़की के परिजनों ने दिनांक 16 मई 2022 को सिमरोल थाने पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराते हुए पुलिस को  बताया था कि बेहाल फुसलाकर दो आरोपी हमारी बेटी को ले गए। जहां पर दो आरोपियों ने मिलकर नाबालिग के साथ खोटा काम भी किया। पुलिस ने पीड़ित परिवार की फरियाद पर केस दर्ज किया  और दोनो ही आरोपियों को तीन माह बाद यानि 4 सितंबर 2022 को तलाश कर गिरफ्तार किया। जहां सोमवार यानि  5 सितंबर 2022 को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया।

सिमरोल थाना प्रभारी की करतूत पर उठ रहे गंभीर सवाल....

सिमरोल थाने के एक आरक्षक और एक सैनिक को आरोपियों को जेल ले जाने के लिए किसी तरह का साधन नही मिलने से वह भी परेशान होते रहे और खौफ के साथ इतनी दूर पैदल जाने पर भी मजबूर हुए। यदि मान लीजिए आरोपी हटकडी खोलकर या दोनो जवानों पर हमला कर भाग जाते तो किसे दोषी माना जाता। यह लापरवाही सिमरोल थाना प्रभारी की उभरकर सामने आई है। थाना प्रभारी को इतने संगीन धाराओं में अपराधियों को बिना सुरक्षा के कैसे भेज दिया।जबकि सिमरोल से जवानों को वाहन उपलब्ध कराया गया था,परंतु महू न्यायालय छोड़कर वो वाहन भी चला गया था। जिसके बाद आरोपियों को जेल भेजने के लिए दोनो ही जवानों को फजीहत का सामना भी करने को मिला।

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