जौनपुर: PDM प्रत्याशी शाह आलम के मैदान में उतरने से बिगड़ सकता है गठबंधन प्रत्याशी बाबूसिंह कुशवाहा का खेल,


जौनपुर। मतदान की तिथि करीब आते ही प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार भी बड़ी तेज़ी से बढ़ रहा है। अगर बात करे प्रत्याशियों की तो एक तरफ इंडिया गठबंधन प्रत्याशी बाबू सिंह कुशवाहा है तो वही दूसरी तरफ NDA प्रत्याशी कृपा शंकर सिंह और बीएसपी से दूसरी बार श्याम सिंह यादव भी चुनावी मैदान में उतरे है।
वैसे तो पार्टी सिंबल के प्रत्याशी से लेकर छोटे दल व निर्दल भी अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे है।
जिसमे सपा, बसपा और भाजपा का तो अपना वोट बैंक है लेकिन छोटे दल के गठबंधन के प्रत्याशी भी किसी भी प्रत्याशी का खेल बिगाड़ सकते है
अभी तक बाबू सिंह कुशवाहा का बाहरी उम्मीदवार का तमगा हटा भी नहीं था की छोटे दलों के गठबंधन  यानी PDM प्रत्याशी शाह आलम के चुनावी मैदान में उतरने से बाबू सिंह कुशवाहा की मुश्किलें बढ़ गई है
वैसे तो मुस्लिम मतदाताओं को सपा का वोट बैंक माना जाता था जिसका मुख्य कारण मुलायम सिंह यादव थे 
जोकि मुसलमानों का खुल कर साथ देते थे और हर सुख दुख की खड़ी में साथ खड़े रहते थे और सड़क से सदन तक मुसलमानों की आवाज़ बुलंद करते थे।
वही बात करे सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तो वो मुलायम सिंह की तरह जमीनी स्तर के नेता नहीं माने जाते है और अपने पिता की तरह मुसलमानों का खुल कर समर्थन करने से भी कतराते रहे है और टिकट बंटवारे से लेकर किसी भी मुद्दे पर खुल कर मुस्लिम समुदाय का साथ नहीं देते दिखे।
जिसके कारण सेकुलर पार्टियों से मुस्लिम समुदाय का मोह भंग हो चुका है।
तो वही असदुद्दीन ओवैसी मुस्लिमो और दलितों के हर मुद्दे को प्रमुखता से सड़क से सदन तक उठाते रहे है इन्हीं कारनो से बड़ी ही तेजी से मुस्लिम समुदाय का ओवैसी की तरफ झुकाव हाल फिलहाल बढ़ा है खास कर मुस्लिम यूवाओ में उनका क्रेज देखने को मिलता है।
अपना दल क़मेरावादी और मीम गठबंधन प्रत्याशी का चुनावी मैदान में आने से मुस्लिम वोट में सेंध लगना तय है जिससे इंडिया गठबंधन प्रत्याशी का चुनाव जीतना आसान नहीं होगा
अगर बात करे मौर्या समाज की तो वो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या को अपना नेता मानते है और खुल कर भाजपा का समर्थन विगत कई वर्षों से करते आ रहे है,
इंडिया गठबंधन की मुश्किलें तब और बढ़ गई जब जिले के धाकड़ नेता धनंजय सिंह ने चुनाव में भाजपा का समर्थन करने का ऐलान कर दिया।
फिलहाल लोकतंत्र में जनता ही सर्वे सर्वा है और वो जिसे चाहे पलको पर बिठा ले या प्रत्याशी की जमानत जब्त करा दे।

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